कन्नौज। करीब चार साल पहले बहू को जिंदा जलाकर हत्या करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी सास को दस साल कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी पड़ेगी। यह फैसला जज इंद्रजीत द्वितीय ने सुनाया। जबकि साक्ष्यों के अभाव में पति को दोष मुक्त करार दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए।
शासकीय अधिवक्ता बृजेश शुक्ला ने बताया कि छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के कपूरपुर गांव निवासी एजाद ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उसने अपनी पुत्री शाहीन की शादी तीन दिसम्बर 2018 को गांव के ही जीशान के साथ की थी। शादी में सामर्थ के अनुसार खूब दान दहेज दिया था। शादी में मिले दहेज से ससुरालीजन खुश नहीं हुए। अतिरिक्त दहेज में बाइक व व्यापार करने के लिए तीन लाख रुपए की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर बेटी को मानसिक व शारीरिक प्रताड़नाएं देने लगे।
14 अप्रैल 19 की दोपहर बेटी के घर से शोरगुल व धुआं उठता दिखाई दिया। जिस पर मोहल्ले वाले मौके पहुंच गए। एक कमरे की कुंडी बंद थी और बटी आग की लपटों में घिरी हुई चीख रही थी। आरोप लगाया था कि पति जीशान, सास अनवरी बेगम व ससुर इरफान उर्फ तौला ने बेटी को आग लगा दी। बेटी को गंभीर हालत में सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से उसको सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। सैफई जाते समय रास्ते में बेटी की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर पति व सास के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किए।
सोमवार को साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज इंद्रजीत द्वितीय ने सास अनवरी बेगम को दोषी करार देते हुए दस साल कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आठ हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साक्ष्यों के अभाव में पति जीशान को दोष मुक्त कर दिया गया।