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कुष्ठ रोग से बचाव के तरीके बताए

Wed, 25 Mar 2015 12:15 AM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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जिले से कुष्ठ रोग का सफाया करने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को सीएमओ कार्यालय के प्रशिक्षण सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया।
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पहले दिन जिला कार्यक्रम अधिकारी कुष्ठ रोग डा. कमल राय ने बताया कि चमड़ी पर दाग और दाग में सुन्नता, जलन, चुभन, दर्द का एहसास कम होना या बिलकुल न होना कुष्ठ रोग की पहचान है। इसके अलावा हाथ, पैरों और आंखों में कमजोरी, नसों में सूजन, मोटापन या दर्द, चेहरे, शरीर और कान पर गांठें छाले और घाव जिससे दर्द न हो रहा हो के अलावा हाथ और पैरों में विकृति हो, ऐसी दशा कुष्ठ रोग में होती है।

इस तरह के लक्षण पाए जाने पर तत्काल मरीज को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र  भेजें। मरीज को बताएं कि कुष्ठ रोग का इलाज सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त में किया जाता है। शुरुआत में इलाज शुरु कर देने से कुष्ठ रोग की विकलांगता नहीं होती है। कुष्ठ रोगी पूरी तरह से सामान्य जीवन जी सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग बहुत ही कम संक्रामक रोग है। यह रोगाणुओं के कारण होता है। यह मुख्य रूप से चमड़ी और तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। यह रोग लगातार बढ़ता रहता है और पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है। कुष्ठ रोग किसी भी आयु में स्त्री और पुरुष को हो सकता है। सफेद दाग कुष्ठ रोग नहीं होता है।
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कुष्ठ रोग का उपचार एमडीटी दवा द्वारा संभव है। एक पत्ते में 28 दिन की दवाइयां होती हैं। एक से 5 धब्बों का छह महीने का उपचार होता है। पांच से अधिक धब्बे होने पर 12 महीने का इलाज चलता है। उन्होंने बताया कि जोड़ों में दर्द, चमड़ी में सूजन, दर्द व लालपन के साथ अचानक बुखार आना पीलिया, पेट दर्द, उपचार के तुरंत बाद पूरे शरीर में खुजली होना व हल्के दाग उत्पन्न होना दिखाई दे तो तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डाक्टर की सलाह लें। इस मौके पर उमेश चंद्र, सुजीत कुमार, संजीव, हुस्नबानो, बीडी वर्मा, मोहर सिंह, हामिद अली, शकील अहमद, एसएन सिंह बघेल, श्रीभगवान आदि मौजूद रहे।
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