नगर के शांति निकेतन विद्यापीठ जूनियर हाईस्कूल परिसर
में चल रही वृंदावन धाम की रासलीला में सुदामा चरित्र की लीला का मंचन देख
दर्शक भावविभोर हो गए।
रासलीला के दौरान वृंदावन धाम के कलाकारों
द्वारा भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता की लीला का शानदार मंचन किया गया।
गुरुकुल से लेकर शुरू हुई दोनों के बीच दोस्ती द्वारिकाधीश द्वारा अपने
महल में पहुंचे बाल सखा सुदामा को दो लोकों का राजा बनाने के प्रसंग की
लीला का मंचन हुआ।
इस दौरान वृंदावन के आचार्य स्वामी अवधेश शर्मा ने कहा
कि द्वापर में भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन आया है। उन्होंने
कहा कि मित्र बहुत होते हैं पर सखा एक ही होता है। सख्याते इति यस्य स:सखा
अर्थात एक से दूसरे का आभास होना। जैसे पांच किमी दूर धुआं दिखाई देने पर
मुंह से बरबस निकलता है वहां आग है।
हालांकि हमने आग नहीं केवल धुआं देखा।
यही कृष्ण व उनके सखा सुदामा का हाल है। पहले भिक्षुक बनकर कृष्ण
सुदामा के द्वार पर भिक्षा मांगने आए, जबकि सुदामा कृष्ण की द्वारिका में
कोई कामना लेकर नहीं गया केवल एक भाव था कि मित्र से मिलना है।
उन्होंने
कहा कि भगवान से धन कभी मांगना भी नहीं, क्योंकि हम मांगेंगे अपनी औकात से
और नहीं मांगोगे तो वह अपनी हैसियत से देगा। सुदामा निष्काम थे, इसलिए
प्रभु श्रीकृष्ण ने अपने समान धन संपत्ति उन्हें दी। लीला के अंत में
मां नव दुर्गा समिति के अध्यक्ष राजीव दुबे, शोभा दुबे, रामांनद वर्मा,
नेमीचंद्र राठौर, दिलीप गुप्ता, सुरेश पेंटर, भाष्कर चतुर्वेदी, आनंद
गुप्ता, करुणा शंकर गुप्ता, नरेश
वर्मा, रोशनलाल वर्मा आदि ने कृष्ण की आरती उतारी।
रासलीला देखने पहुंची
महिलाएं अपने साथ भगवान श्रीकृष्ण को भेंट करने के लिए चावल की पोटली लेकर
आई थी। भगवान को भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।