कन्नौज। 18 फरवरी से शुरू होने वाली यूपी बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन कराने के लिए जिले को तीन जोन और 18 सेक्टरों में बांटकर मजिस्ट्रेटों को जिम्मेदारी दे दी गई है। कहा गया है कि किसी भी हाल में केंद्रों पर नकल नहीं होनी चाहिए, लेकिन इन सबके बीच उन्हें गाड़ी दौड़ाने के लिए जो बजट शासन ने जारी किया है वह इतना कम है कि बाइक भी हर केंद्र का चक्कर लगा ले तो बड़ी बात है। मजिस्ट्रेटों की इन 21 टीमों को अपनी गाड़ी दौड़ाने के लिए मात्र 19 हजार का बजट दिया गया है। इतने बजट से यह लोग 14 दिन तक परीक्षा केंद्रों की निगरानी करेंगे। यानी प्रत्येक टीम को 14 दिन के डीजल के लिए 1357 रुपये दिए गए हैं। एक दिन की बात करें, तो यह रकम करीब 64 रुपये 62 पैसे बैठती है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए यूपी बोर्ड से 56500 रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस बजट में 19 हजार रुपये जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेटों को डीजल भरवाने के लिए दिया जाएगा। जबकि पांच उड़नदस्ता टीमों की गाड़ियों के लिए 37500 रुपये का बजट है। जिले में बनाए गए परीक्षा केंद्र काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में निरीक्षण के लिए प्रतिदिन मजिस्ट्रेट को 64 रुपये 62 पैसा ही डीजल के लिए मिलेगा। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब गाड़ी में डीजल नहीं होगा तो निगरानी कैसे होगी? डीआईओएस राजेंद्र बाबू ने बताया कि महंगाई के हिसाब से बोर्ड से उपलब्ध कराया गया बजट काफी कम है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पेपर भी कम है। इस कारण कोई विशेष दिक्कत नहीं होगी।
.
पिछले वर्ष से भी कम मिला बजट
कन्नौज। वर्ष 2019 की तुलना में 2020 में काफी कम बजट मिला है। पिछले वर्ष सेक्टर मजिस्ट्रेट के लिए 22 हजार व सचल दल के लिए 43 हजार रुपये का बजट आवंटित हुआ था। हालांकि इस बार परीक्षा केंद्र भी कम हैं। पिछले वर्ष जिले में 83 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस बार घटकर 79 रह गए हैं।