कन्नौज। पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच लगातार कम होती हरियाली से सूख रही धरती की कोख अब बिगड़ते पर्यावरण की कहानी बयां कर रही है। पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन का ही नतीजा है कि समय से पहले ही नदियों की जलधारा कम हो रही है। सड़क किनारे की हरियाली सिमट गई है। बाग की संख्या कमी हो रही है। खेतों में फसल लहलहाने की जगह वहां मकान बनने लगे। लब्बोलुआब यह कि जिस पृथ्वी पर रहते हैं, उसी की फिक्र करने का समय किसी के पास नहीं है। नतीजा इस बार की भीषण गर्मी ने परेशान कर रखा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण होता है। हर साल बरसात के मौसम में देखते ही देखते लाखों पौधे एक साथ लगाए जाते हैं। पौधारोपण से पहले बाकायदा खूब कार्यक्रम होता है। बड़े चेहरे कैमरे के सामने अपने हाथों से पौधा लगाकर उसमें पानी भी डालते हैं लेकिन उसके बाद भूल जाते हैं। किसी को फिक्र नहीं रहती। खुद प्रशासनिक अमला भी अपनी खामियों को छिपाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने लगता है। नतीजा यह कि लाखों पौधे देखते ही देखते हजारों में रह जाते हैं। उसके बाद वह कब सैकड़ों में रह गए, इसका पता भी नहीं चलता है। यहां पौधारोपण के मुकाबले लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार साल में जिलेभर में वन विभाग और दूसरे महकमों ने एक करोड़ से ज्यादा पौधा लगाए।
कन्नौज में 45 हजार हेक्टेयर है वन क्षेत्र, फिर भी बढ़ा डार्क जोन
जिले में वन क्षेत्र का दायरा 45 हजार हेक्टेयर है। नियम के मुताबिक उस क्षेत्र न किसी तरह की खेती हो सकती है, न ही किसी तरह स्थाई या अस्थाई निर्माण हो सकता है। उस पूरे क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ पौधारोपण ही करवाना होता है। लगाए गए पौधों की देखरेख करके उसे बड़ा बनाने के लिए एक पूरा विभाग काम करता है। लेकिन पिछले कई सालों से इस क्षेत्र का दायरा नहीं बढ़ा, जबकि इस बीच लाखों पौधे लगाए जा चुके हैं। अधिकांश पौधे बेकार होकर बड़ा होने से पहले ही खत्म हो गए, इसलिए इसका दायरा नहीं बढ़ा। हैरानी यह कि खुद वन विभाग के पास भी इसका दायरा बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है। सिर्फ पौधारोपण का ही रटा-रटाया जवाब है। जंगलों में हो रहे अवैध कटान से भी पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है।
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जीटी रोड चौड़ीकरण ने उजाड़ डाली हरियाली
पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही के बीच विकास के नाम पर भी कई पेड़ों को कुर्बान होना पड़ रहा है। अलीगढ़ से कानपुर के बीच जीटी रोड के चौड़ीकरण के नाम पर भी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा चुके हैं। वन विभाग को तो इसका मुआवजा मिल गया, लेकिन हरियाली के कम होने से पर्यावरण का जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई के लिए अब तक कोई काम नहीं हो सका है। बनकर तैयार हुए नेशनल हाईवे के डिवाइडर पर फूलों के पौधे तो लगाए गए, लेकिन बड़े कम ही दिख रहे हैं।
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पौधारोपण का पिछले चार साल का लेखाजोखा
-वर्ष 2019 में 19,77,299 पौधे लगे
-वर्ष 2020 में 26,02,802 पौधे लगे
-वर्ष 2021 में 30,75,162 पौधे लगे
-वर्ष 2022 में 37,23,874 पौधे लगे