कन्नौज। हनुमान गढ़ी अयोध्या के प्रसिद्ध महंत राजूदास ने आज सनातन धर्म की वर्तमान स्थिति और हिंदुओं की अपने संस्कारों के प्रति बढ़ती उदासीनता पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग धर्म का मार्ग अपना रहे हैं उनकी संख्या तो बढ़ रही है लेकिन जिन हिंदुओं ने अपनी जड़ों और परंपराओं को भुला दिया है, वे आज लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं।
सोमवार को ऋषिनगर मानीमऊ स्थित आनंदेश्वर धाम पर आयोजित कार्यक्रम में महंत राजूदास ने धर्म के पतन के लिए सीधे तौर पर उन धर्माचार्यों को जिम्मेदार ठहराया जो मठों और आश्रमों की सुख-सुविधाओं तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कई धर्माचार्य मठों से बाहर ही नहीं निकलते। वे ऊपर छतरी और पीछे पंखा झालते शिष्यों के बीच आराम से बैठे रहते हैं। उन्होंने धर्म को केवल एक गौशाला, एक गुरुकुल या एक विद्यार्थी तक ही सीमित कर दिया है, जबकि समाज को उनकी सक्रियता की जरूरत है। उन्होंने आधुनिक समाज के दोहरे मानदंडों पर प्रहार करते हुए कहा कि आज शादी-बारातों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। लोग डीजे, शराब और शाही खाने पर पानी की तरह पैसा बहाने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन जब मंत्रोच्चारण करने वाले पंडित जी अपनी दक्षिणा मांगते हैं, तो लोगों पर आफत टूट पड़ती है।