आलू की फसल में पिछेती झुलसा टाइप के किसी विचित्र
रोग ने किसानों की कमर तोड़ दी है। प्रकृति का कहर झेलने वाले किसानों के
लिए अब इस नई मुसीबत ने दस्तक दे दी है। ठठिया क्षेत्र में आलू की फसल में
फैल रही यह बीमारी तेजी से बेल को सुखाती जा रही है।
पहले गेहूं की फसल
में ओलावृष्टि, फिर मक्के की फसल में सूखा के बाद अब आलू की फसल में रोग
पैदा होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के
बल्लपुरवा गांव निवासी किसान रामाधार कटियार ने बताया कि उनकी आलू की फसल
में झुलसा बीमारी तेजी से लग गई है।
इससे आलू की हरी-भरी लहलहाती बेल तेजी
से सूख कर नष्ट हो रही है। बेल के बाद तना भी नष्ट हो रहा है। कई प्रकार की
दवाइयों का इस्तेमाल करने के बाद भी कोई लाभ नहीं नजर आ रहा है।
रिक्खापुरवा गांव निवासी श्याम किशोर दीक्षित ने बताया कि आलू के पौधे का
तना व बत्ती पर काले धब्बे पड़ जाते हैं। इसके बाद वह सूख जाती है।
इस कारण
मिट्टी के अंदर तैयार हो रहे आलू की वृद्धि रुक गई है। गांव मधईपुरवा
निवासी चंद्रप्रकाश ने बताया कि झुलसा जैसी दिखने वाली बीमारी कोई नया
विचित्र रोग है। इस बीमारी का असर पत्ती के साथ ही तने पर भी पड़ रहा है।
कई बार तना गलकर पौधे को नष्ट कर रहा है, इसलिए झुलसा की दवा कारगर नहीं
साबित हो रही है।
बहादुरपुर निवासी अरविंद दोहरे ने बताया कि वह बटाई पर
खेत लेकर खेती करते हैं। आलू की फसल को बचाने को कई तरह की दवाई डालने का
प्रयोग कर चुके हैं, पर बेल लगातार सूखती चली जा रही है। किसान ज्यादातर
दवा विक्रेताओं की सलाह पर खेतों में दवा का प्रयोग कर रहे हैं, क्योंकि
कृषि व उद्यान विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस
बीमारी के प्रकोप से बेहटा, ठठिया, महसैंया, रिक्खापुरवा, बल्लपुरवा, मधई
पुरवा, जनेरी, भखरौली, सुर्सी, भुन्ना समेत दर्जनों गांवों को अपनी गिरफ्त
में ले चुका है। कई किसानों ने तो नुकसान देखकर खेतों की बगैर आलू खोदे
ही जुताई कर दी है, ताकि गेहूं की फसल की बुआई कर सकें।
इस बाबत उद्यान
विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि झुलसा रोग यदि एक
बार फैल जाए तो वह कंट्रोल में नहीं आता है। कहा कि किसान जैसे ही खेत में
आलू की फसल पर धब्बे या पत्ती सूखती देखें तो फौरन दवा डालना शुरू कर दें,
तभी आलू को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।