ग्राम महमूदपुर खास में चल रही श्रीरामकथा महायज्ञ
में कथा व्यास द्वारा ध्रुव चरित्र की कथा का प्रसंग बड़े ही रोचक ढंग से
प्रस्तुत किया गया। इस दौरान ध्रुव चरित्र की कथा सुन श्रोता भावविभोर हो
गए।
संत रामदास त्यागी महाराज के सानिध्य में ग्राम महमूदपुर खास में
चल रहे महायज्ञ और रामकथा के दौरान कथा वाचक आचार्य अवधेश पांडेय ने ध्रुव
चरित्र की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि उत्तानपाद की दो
पत्नियां सुरुचि और सुनीति थी। सुरुचि के पुत्र का नाम उत्तम और सुनीति के
पुत्र का नाम ध्रुव था।
उन्होंने कहा कि जीव मात्र उत्तानपाद है। माता के
गर्भ में रहने वाले सभी जीव उत्तानपाद हैं। जीव मात्र की दो पत्नियां होती
हैं। सुरुचि और सुनीति। इंद्रियां जो भी मांगे उन विषयों का उपयोग करने की
इच्छा ही सुरुचि है। उत्तम का भाव है उद माने ईश्वर और तम माने अंधकार।
अज्ञान
ईश्वर के स्वरूप का अज्ञान ही उत्तम का स्वरूप है। इंद्रियों के दास होने
पर ईश्वर स्वरूप का ज्ञान नहीं हो सकता, क्योंकि वह सुरुचि में फंसा है और
विलासी जीवन जीता है। वह ईश्वर को नहीं पहचान सकता। इसी तरह सुनीति का
पुत्र ध्रुव है जो अविनाशी, अनंत और ब्रह्मानंद हैं, जो कभी नष्ट नहीं होने
वाला है।
मनुष्य यदि सुनीति के आधीन है तो सदाचारी बनता है। पहला क्षणिक
सुख देता है और दूसरा अंत में सुख देता है। कार्यक्रम के दौरान दलगंजन सिंह
यादव, रामरूप यादव, भुल्लन यादव, प्रबंधक संतोष यादव, नवीन शुक्ला, रामपाल
नागर कमलेश दुबे, वैरव बाबा, लालमुनि बाबा और श्रीराम बाबा आदि लोग मौजूद
थे।