दशमोत्तर छात्रवृत्ति को लेकर जिले के करीब 12 हजार
छात्र-छात्राओं को राहत प्रदान करने के लिए शासन से अनुरोध करने पर अब 31
जनवरी की रात्रि 12 बजे तक के लिए लागिन को खोल दिया गया है। इसके बाद अब
अधिकारियों की ओर से संदिग्ध डाटा सही करने को लेकर कसरत की जा रही है,
ताकि अधिक संख्या में छात्रों को स्कालरशिप का लाभ दिलाया जा सके।
ज्ञात
हो कि दशमोत्तर छात्रवृत्ति को लेकर सामान्य, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक,
अनुसूचित जाति के छात्रों का 43,725 छात्रों का डाटा शासन को फारवर्ड किया
गया था। इन डाटा की जांच के बाद 30,361 छात्र-छात्राओं का डाटा सही पाया
गया, जबकि 13 हजार से ज्यादा छात्रों का डाटा संदिग्ध निकला।
इसके बाद लखनऊ
एनआईसी से जांच कराने के बाद 27,875 का डाटा फारवर्ड होकर आया। इसके बाद
जिला कमेटी की जांच के बाद 26,105 छात्रों के डाटा को लाक करने के निर्देश
प्रदान किए गए, जबकि 11,889 छात्र संदेह की श्रेणी में डाल दिए गए।।
इसके
अलावा 11,889 संदिग्ध डाटा के बाबत स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों
को निर्देश जारी किए गए कि वह 31 जनवरी तक इस डाटा को सही कर लें। इस
बाबत जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी राजेश कुमार बघेल ने बताया कि जिले में 247
इंटर और डिग्री कालेज हैं। इसमें 156 ने अभी तक डाटा सही करके भेजा है।
उन्होंने बताया कि पहले 25 जनवरी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी, पर सभी
कालेजों से डाटा न आ पाने के कारण जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने शासन से
विशेष अनुरोध किया, इसके बाद लागिन को 31 जनवरी तक के लिए खोल दिया गया है।
इस दौरान छात्र अपने डाटा को शुद्ध कर सकते हैं।
इसके अलावा यदि
छात्र-छात्राओं को मालूम है कि वह संदिग्ध डाटा को श्रेणी में हैं, तो वह
उन बिंदुओं को शुद्ध करके अपना आवेदन संबंधित विभाग के पास सीधे भी जमा कर
सकता है। उधर, जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी राजेश बघेल का कहना है कि
दशमोत्तर छात्रवृत्ति अधिक संख्या में छात्रों को मिल सके। इसके सारे
प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संदिग्ध डाटा में करीब पांच हजार
छात्र-छात्राएं शेष छूटेंगे जिनको लाभ नहीं मिल पाएगा। इसमें कई बिंदु
शामिल हैं। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति मामले में एक बात और निकलकर सामने आई
है कि जाति व आय प्रमाण पत्र बनवाने में बड़े पैमाने पर तहसीलों में खेल
हो रहा है।
जिसमें तिर्वा एवं छिबरामऊ क्षेत्र काफी आगे है। इसके अलावा
तमाम लोकवाणी केंद्र भी खेल में शामिल है। जांच के दौरान पता चला कि उनके
पास जो प्रमाण पत्र हैं वह बोर्ड आफ रेवन्यू में शो ही नहीं हो रहे हैं। इस
कारण वह लाभ से वंचित हो रहे हैं।