कन्नौज। आलू बेल्ट इलाके में सब्जियों का राजा इस बार तंगहाल है। फसल का वाजिब रेट न मिलने की वजह से किसान खेतों में खोदाई के बाद आलू को बीन नहीं रहे हैं। अधिकांश किसान एक बीघे जमीन में एक से दो पैकेट आलू छोड़ रहे हैं। साथ ही अगली फसल के लिए जुताई कर रहे हैं।
जनपद में 51-52 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की पैदावार होती है। 14 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन की संभावना है। 153 कोल्ड स्टोर में इतना ही आलू रखा जा चुका है। पड़ोसी जिलों से भी किसान यहां आकर शीतगृहों में आलू का भंडारण कर रहे हैं। कन्नौज जिले में अब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। यह बात अलग है कि सरकार की ओर से आलू खरीदने को घोषित 650 रुपये प्रति क्विंटल दाम से संतुष्ट नहीं हैं। बाजार में आलू भाव की बेकदरी के चलते किसान खेतों में काफी आलू छोड़ रहे हैं। बाजार में 50-55 किलोग्राम वाले आलू पैकेट का रेट 200 से 300 रुपये के बीच है। हालांकि अच्छे आलू जैसे चिप्सोना व सिंदूरी का दाम अधिक है।
किसान रामनरेश का कहना है कि अगर सरकार खरीद केंद्र खोलती भी है तो उसमें कई नियम लागू कर देगी, जिससे किसान अपना आलू वहां नहीं बिक्री कर पाएगा। बुजुर्ग किसान प्रदीप राजपूत का कहना है कि अगर सरकार एक तरफ से आलू खरीदे तो सही, साइज व अच्छा आलू लेने पर किसान को 650 रुपये में नुकसान होगा। मजबूरी वश किसान अपना आलू शीतगृहों में रख रहे हैं।
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बयान
अभी शीतगृहों में 12 फीसदी जगह है। सभी किसानों का आलू सुरक्षित रखने के प्रयास हो रहे हैं। भंडारण शुल्क को कम करने को लेकर भी बातचीत चल रही है। इस पर निर्णय नहीं हुआ है।
सीपी अवस्थी, जिला उद्यान अधिकारी
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फोटो -06- छुन्नू। संवाद
रेट कम होने की वजह से छोड़ा आलू
शहर से सटे इलाके बलई निवासी 65 वर्षीय छुन्नू कहते हैं कि उन्होंने पांच बीघे खेतों में चिप्सोना आलू किया है। 50 से 55 किलो के पैकेट की कीमत ही 500 रुपये से अधिक है, उनको 325 रुपये में नुकसान होगा। पिछले साल 600-700 रुपये प्रति पैकेट आलू बिक्री किया था। इस बार रेट कम होने की वजह से खेतों में काफी आलू छोड़ दिया है। यह हालत तीन-चार सालों में आती है। रेट सही मिले, इसके लिए आलू को बाहर भेजा जाना चाहिए।
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फोटो-07- नरेंद्र। संवाद
किसान के पास नहीं रहेगा आलू
बलई के ही रहने वाले 50 वर्षीय किसान नरेंद्र का कहना है कि सरकार खरीद केंद्र खोलने का गलत दावा कर रही है। जब किसान आलू शीतगृहों पर रख देगा और बाजार में बिक्री कर देगा, उसके बाद ही सरकारी खरीद शुरू होगी। तब किसान कैसे बिक्री करेंगे। हालांकि सरकार की ओर से घोषित 650 रुपये प्रति क्विंटल रेट कम है। बाजार में रेट न मिलने की वजह से खेतों में आलू पूरी तरह से नहीं बीना गया है।