तालग्राम। कोरोना की वजह से लॉकडाउन की मार झेल चुके किसान अब आलू की मंदी से कराह रहे हैं। इस समय कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू के भाव काफी गिरे हुए हैं। इस समय 380 से 400 पैकेट(50 किलो) यानी 760 से 800 रुपये क्विंटल आलू बिक रहा है। इसमें इन्हें तगड़ुी आर्थिक चोट पहुंच रही है।
किसानों ने आलू भंडारण से पहले 500 से 600 रुपये पैकेट के भाव पर आलू बचने से मना कर दिया था। आगे अच्छे रेट की आस में कोल्ड स्टोरेज में भंडारित कर दिया था। अब यह 380 से 400 रुपये के हिसाब से प्रति पैकेट (50 किलो) बेचने के लिए मजबूर हैं। इसमें शीतगृह का 125 रुपये प्रति पैकेट भाड़ा देना पड़ रहा है। पिछले साल आलू किसानों को अच्छा मुनाफा हुआ था। कोल्ड स्टोरेज में एक हजार से 1400 रुपये पैकेट से अधिक में आलू बिका था। अबकी बार लागत भी नहीं निकल रही है। इससे आलू किसान परेशान हैं।
किसानों ने बयां किया दर्द
आसमपुर पट्टी के कुलदीप का कहना है कि महंगा बीज लेकर आलू तैयार किया था। बंपर पैदावार हुई। 50 पैकेट बीघा आलू निकला। खुदाई के समय अच्छे रेट मिल रहे थे। तब महंगा होने की उम्मीद में नहीं बेचा। अब घाटा हो रहा है।
मायापुर्वा के किसान लाखन सिंह का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज से निकासी शुरू हो गई है। रेट गिरने से कम किसान ही निकाल रहे हैं। इसी तरह निकासी हुई और समय धीरे-धीरे बढ़ता गया तो आलू के दाम और गिर सकते हैं।
भुलानी गांव के किसान रामू यादव का कहना है कि एक बीघा में 50 पैकेट की पैदावार हुई है। बिक्री के हिसाब से इस समय 19 हजार रुपये मिल रहे हैं। लागत 20 हजार से अधिक आई है। इससे इस बार घाटा हो रहा है।
आलू व्यापारी पप्पू का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद भी बाहर की मंडियों में आलू की डिमांड नहीं बढ़ी। शहरों की मंडियों में मांग बढ़ने पर कुछ उम्मीद की जा सकती है। भाव न बढ़े तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।
कोल्ड स्टोरेज में भंडारण तक आलू की लागत (प्रति बीघा )
आलू बीज 6000 रुपये, बुआई-जुताई 1500 रुपये, खाद, दवा, सिंचाई व निराई 4000 रुपये, खुदाई का मजदूर खर्च 1200 रुपये, बारदाना व कोल्ड तक ले जाने का भाड़ा 1750 रुपये, कोल्ड स्टोरेज भाड़ा 6250 रुपये यानी 20700 रुपये खर्च हुए। इस समय 50 किलो का पैकेट 380 रुपये में बिक रहा है। एक बीघा में पैदावार 50 पैकेट के 19000 रुपये हो रहे हैं। इससे किसानों को एक बीघा में एक हजार सात सौ का घाटा हो रहा है।