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170 साल पुराना नहर का पुल जर्जर

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हसेरन। निचली रामगंगा नहर का पुल जर्जर हालत में पहुंच गया है। यह पुल हादसे को दावत दे रहा है। ब्रिटिश शासनकाल में बने इस पुल के जीर्णोंद्धार के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जाती रही है।
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ब्रिटिश शासन में रामगंगा नहर पुल का निर्माण साल 1851 में करवाया गया था। यह निर्माण अंग्रेज इंजीनियर मिस्टर ह्यूम की देखरेख में हुआ था। 170 साल पुराना यह पुल जर्जर हालात में पहुंच चुका है। पुल के जीर्णोंद्धार को आजाद भारत की कई सरकारों ने बजट खर्च किया पर अफसरों ने जीर्णोद्वार के नाम पर लीपापोती की। इस पुल से गुजरने वाले लोगों को सदैव अपनी जान का खतरा रहता हैं। पुल की दुर्दशा को लेकर आसपास के गांव के लोगों ने कई बार अफसरों का दरवाजा भी खटकाया पर कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण रामचंद्र ने बताया कि 25 साल पहले 1995 में आलू लदा ट्रक कानपुर जाते समय नहर पुल को पार करते समय सुरक्षा रेलिंग से जा टकरा गया था। इसमें एक युवक की जान भी चली गई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन की नींद खुली थी और पुल पर मरम्मत के नाम पर फिर से लीपापोती कर दी गई।
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