कन्नौज। जम्मू-कश्मीर के जंगलों में पाए जाने वाले औषधीय पौधे मोनार्डा अब यहां के खेत में पैदा होंगे। इससे किसानों को मुनाफा होगा। जिले में पहली बार अनुदान पर सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) 150 किसानों को करीब दो हजार बीघा में मोनार्डा की खेती करने का मौका देगा।
मोनार्डा पौधे पर जम्मू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंट्रीगेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) के वैज्ञानिकों ने शोध किया था। इसके परिणाम में मोनार्डा में अनेकों गुण और विशेषताएं समाने आईं हैं।
2019 में आईआईआईएम की ओर से सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला को पत्र लिखकर कन्नौज में मोनार्डा पौधे उगाने की सलाह दी थी। इसके बाद आईआईआईएम और एफएफडीसी के संयुक्त प्रयास से इसकी नर्सरी तैयार की गई। इससे मोनार्डा का तेल निकालने का प्रयास भी सफल रहा। निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि जिले में करीब 150 किसानों को दो हजार बीघा में अनुदान पर मोनार्डा की खेती कराई जाएगी। इससे किसानों की आय दोगुनी होगी। (संवाद)
अजवाइन का विकल्प, औषधीय गुणों से भरपूर
सुगंधित मोनार्डा पौधा अजवाइन का विकल्प है। सब्जियों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। जीवन रक्षक दवाओं में इसके तेल का इस्तेमाल होता है। इसका तेल लगाने से सर्दी से राहत मिलती है।
डेंगू-मलेरिया के लिए कारगर है मोनार्डा
मोनार्डा सिट्रियोडेरा प्रजाति का पौधा है। लेमन मिंट और लेमन बीबान पौधों की तरह मोनार्डा पौधे की महक से मच्छर दूर भागते हैं। घर के आंगन या बालकनी में इस पौधे को लगाने से डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा नहीं रहता है।
दो हजार रुपये प्रति किलो बिकता तेल
अक्तूबर में इसकी खेती कराई जाएगी। डॉ. शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि मेंथा और हाईब्रिड तुलसी की तरह इसके पौधे और बीज से तेल निकलता है। यह तेल करीब दो हजार रुपये किलो में बिकता है।