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माइनस 10 डिग्री सेल्सियस में गुजारा समय, मुश्किलों से पहुंचे घर

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परिजनों के साथ यूक्रेन से लौटा छात्र अकील। संवाद - फोटो : KANNAUJ
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गुरसहायगंज। -10 डिग्री तापमान में खाली पेट आठ किमी की दूरी तय की। इससे पहले 50 साथियों के साथ चंदा एकत्र कर दो लाख रुपये में बस किराये पर की और यूक्रेन से घर पहुंचने की जद्दोजहद शुरू की। बस वाले ने रोमानिया बार्डर से आठ किमी पहले उतार दिया। शुक्र यह रहा कि रोमानिया पहुंचने पर भारत सरकार ने उनकी मदद की।
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यह आपबीती यूक्रेन से लौटे एमबीबीएम छात्र अकील ने बताई। दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते गांव डुडवा बुजुर्ग के महफूज रजा के पुत्र अकील मंगलवार रात यूक्रेन से लौटे हैं। अकील रजा ने बताया कि यूक्रेन में एमबीबीएस दूसरी साल की पढ़ाई कर रहा है। रूस के हमले के बाद उसे देश छोड़ने के लिए कहा गया, जिससे वह और तमाम छात्र परेशान हो गए थे। बताया कि 50 साथियों के साथ दो लाख रुपये में बस को किराये पर ली। इसके बाद वे सब रोमानिया के बॉर्डर पहुंचा था। बॉर्डर से करीब आठ किलोमीटर पहले बस ड्राइवर ने सभी सवारियों को उतार दिया।
इसके बाद माइनस 10 डिग्री तापमान पर वे लोग पैदल रोमानिया पहुंचे। जहां पर उनका रहने और खाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से छात्रों को बुलाने का क्रम शुरू हुआ। वह भी सुरक्षित घर आ गया। वहीं मोहल्ला रामगंज निवासी अरुण त्रिपाठी की पुत्री प्रज्ञा त्रिपाठी भी यूक्रेन से सुरक्षित घर आ गई। उसने भी केंद्र सरकार के प्रयास की सराहना की है। हालांकि परिजनों ने इस पर बात नहीं की।
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