क्षेत्र के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के खेतों की प्यास बुझाने वाली जसोदा लिफ्ट कैनाल के कायाकल्प की कवायद शुरू कर दी गई है। नहर की तलहटी को पक्का करने के लिए प्रदेश सरकार ने 1 करोड़ 83 लाख रुपये की कार्ययोजना मंजूर की है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में अमर उजाला ने इस नहर की दुर्दशा को उजागर किया था। सपा नेता व पूर्व ब्लाक प्रमुख रजनीकांत यादव ने जिला पंचायत के सदन में भी यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद शासन ने स्टीमेट तैयार कराकर नहर को पक्का करने के प्रपोजल को हरी झंडी दी।
वर्ष 1972 में बनी यह नहर काली नदी के पानी को लिफ्ट करके संचालित की जाती है। नहर की कच्ची पटरी की कई दशक से मरम्मत न होने के कारण यह जगह-जगह ध्वस्त पड़ी है। इस कारण यह पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही है। नहर की पटरी के कटान की समस्या का समाधान कराने के लिए इसे पक्का करने की योजना को मंजूरी देकर काम शुरू करा दिया गया है।
ताकि टेल तक पानी पहुंच सके। जब यह नहर पूरी क्षमता के अनुरूप पानी देने लगेगी वैसावारी, ताखेपुरवा, तेरारागी, श्याम नगला, सरैंया, कूल्हापुर, जसोरा, फतेहपुर जसोदा, सहतेपुरवा में हरियाली आएगी। हजारों किसान परिवार खेतों में पूरे साल फसलें उगा सकेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति संवरेगी।
नलकूप खंड के अवर अभियंता गिरीश चंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि पहले चार किमी हिस्से को पूरा पक्का करने का स्टीमेट बना था। शासन को स्थानीय स्तर से 4 करोड़ 83 लाख का स्टीमेट गया था, लेकिन 1 करोड़ 83 लाख की ही स्वीकृति मिली है। अब तक 91 लाख रुपये का बजट प्राप्त हो चुका है। उपलब्ध बजट से एक किमी हिस्सा पक्का कराने का कार्य कराया जा रहा है। एक नई नाव व पंपसेट खरीदा जाएगा।
फैक्ट फाइल
जसोदा लिफ्ट कैनाल की कुल लंबाई 8.4 किमी है। इसकी क्षमता 1280 कृषि क्षेत्रफल को पानी देने की है। मौजूदा समय में यह 500 से 600 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल तक ही पानी पहुंचा पाती है। काली नदी के पानी को नहर में डालने के लिए 10-10 क्यूसेक की दो नाव लगी थीं। इनमें एक नाव पंपसेट समेत काली नदी मे डूब चुकी है। दूसरी नाव का पंपसेट पुराना होने के कारण अक्सर खराब हो जाता है।