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जांच में मिली गड़बड़ी, तब भी उसी एजेंसी को काम

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मेडिकल कालेज। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। सोशल वर्कर डॉ. नूतन ठाकुर की शिकायत पर शासन स्तर से हुई जांच में राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा में करोड़ों रुपये का गोलमाल खुलने लगा है। ऑडिट टीम को कर्मचारियों की बायोमीट्रिक में फर्जी हाजिरी दिखाकर भुगतान करना मिला है। छह साल से हर्ष इंटर प्राइसेस को टेंडर देने की बात भी सामने आई है। वहीं, प्राचार्य ने बताया कि वह इस मामले का जवाब शासन को भेज चुके हैं। वहीं इसके बाद भी इसी एजेंसी से काम लिया जा रहा है।
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मार्च 2019 में डॉ. नूतन ठाकुर ने शासन को पत्र भेजकर राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा में कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी दिखाकर करोड़ों रुपये का गोलमाल होने की शिकायत की थी। यहां बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था है। छह साल से लगातार हर्ष इंटर प्राइसेस को टेंडर देने का आरोप भी लगाया था। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव के आदेश पर आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय के अपर निदेशक व पर्यवेक्षणीय अधिकारी उत्तर प्रदेश साजिद आजमी को जांच सौंपी गई थी। साजिद आजमी की निगरानी में संपरीक्षा दल के सदस्य लेखाकार विवेक कुमार त्रिपाठी और सुनील राय ने मामले की जांच शुरू की। आठ जुलाई 2019 से शुरू हुई जांच 16 जुलाई 2019 तक की गई। इसमें सामने आया कि हर्ष इंटर प्राइसेस को करीब छह साल से नियमों की अनदेखी कर टेंडर दिया गया।
2019 में स्वीपर, चपरासी, वार्ड ब्वाय, चौकीदार, धोबी और कारपेंटर पद पर 317 कर्मचारियों की तैनाती दिखाई गई है। ऑडिट टीम के सत्यापन में जून 2019 में 127 संविदा कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज मिली। दो जून से चार जून तक 190 कर्मचारियों के फर्जी बार कोड और फिंगर स्कैन गलत पाए गए। करीब 35 माह में फर्म की ओर से 4.45 करोड़ भुगतान की गई धनराशि में गोलमाल की बात सामने आई। इसके अलावा हर्ष इंटर प्राइसेस के कर्मचारियों से सेवा शुल्क व सर्विस टैक्स के नाम अधिक भुगतान के साक्ष्य मिले। आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशक ने चिकित्सा शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर पूरे मामले के साक्ष्य दिए हैं। वहीं राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि उनके कार्यकाल से पहले 2016 से हर्ष इंटर प्राइसेस को टेंडर दिया गया था। शासन से हुई जांच में कर्मचारियों की हाजिरी कम पाई गई थी। इसका जवाब उनकी ओर से शासन को भेज दिया गया है। वहीं हर्ष इंटर प्राइसेस की जगह दूसरी एजेंसी को टेंडर दिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही नई एजेंसी से सेवाएं लेनी शुरू कर दी जाएंगी।
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