कन्नौज। कभी सूबे की सियासत का मुख्य सेंटर प्वाइंट माने जाने वाले कन्नौज में इस बार नगर निकाय चुनाव को लेकर गदर मचा है। गहमागहमी तो जिले की सभी आठ नगर-निकाय की सीटों पर है पर अधिक उठापटक सदर नगर पालिका सीट में देखने को मिल रही है। अब जबकि सिर्फ एक दिन बाद नामांकन शुरू होना है, और नौबत यह है कि किसी भी पार्टी ने पत्ते नहीं खोले हैं।
इत्र कारोबार के लिए देश-दुनिया में मशहूर कन्नौज में इन दिनों सियासत का गजब घमासान देखने को मिल रहा है। सबसे अधिक छटपटाहट भाजपा के खेमे में देखने को मिल रही है। देश और प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को पिछले चुनाव में यहां करारी शिकस्त मिली थी। विधानसभा चुनाव में डबल इंजन की सरकार का नारा देने वाली भाजपा इस बार ट्रिपल इंजन का नारा देकर शहर की सत्ता पर काबिज होने की जुगत में है। जनता के बीच जाकर प्रतिद्वंदी से भिड़ने से पहले पार्टी को फिलहाल अपनों से ही जूझना पड़ रहा है। एक अदद टिकट के लिए कई दावेदार होने से पार्टी को मशक्कत करनी पड़ रही है। अलग-अलग धड़े का अपना अलग-अलग दावा है। अब देखना है कि भाजपा के टिकट की लॉटरी किसके नाम लगती है।
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पांच टिकट का ऐलान, सदर के लिए सपा में भी मंथन
सूबे की सत्ता पर काबिज रह चुकी सपा यहां जनाधार के बूते शहर की सरकार बनाने का जतन कर रही है। सदर सीट को लेकर मची गदर इस खेमे में भी देखने को मिल रही है। यही वजह है कि जिले की आठ में से पांच सीट पर चार दिन पहले ही उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी सपा कन्नौज नगर पालिका सीट के लिए शांत है। एक अदद जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में पार्टी किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हर पहलू को खंगाल रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि सपा जिसे चुुनाव लड़ाना चाह रही है, उसी दावेदार की ओर से हरी झंडी नहीं मिल रही है। उस दावेदार की ओर से कोई इशारा न मिलता देखकर विकल्प पर मंथन तो हो रहा है, लेकिन किसी नतीजा पर नहीं पहुंचा जा सका है।
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सत्ता में रहकर भी झटका खा चुकी है सपा और भाजपा
भाजपा भले ही देश और प्रदेश की डबल इंजन सरकार का हवाला देकर शहर की सत्ता पर काबिज होने के लिए ट्रिपल इंजन की सरकार का नारा दे रही है, लेकिन सियासत का यह भी अलग ही पहलू है कि सूबे की सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद पिछली बार न तो भाजपा को यहां जीत मिली थी। न उससे पहले सपा को यहां कामयाबी हुई थी। वर्ष 2017 के नगर पालिका चुनाव में प्रदेश में भाजपा की सरकार के होते हुए भी यहां भाजपा उम्मीदवार को करारी हार मिली थी। इसी तरह 2012 में सपा की सरकार होने के बावजूद इस सीट पर भाजपा को कामयाबी मिली थी। ऐसे में इस बार भी दोनों ही पार्टियां पिछली शिकस्त की कसक के बीच आगे का रास्ता निकालने में जुटी हैं।