छिबरामऊ। सिक्खों के दसवें गुरू, गुरु गोबिंद सिंह की जयंती नगर में धूमधाम से मनाई गई। चेयरमैन सहित व्यापारियों तथा समाजसेवियों ने गुरुद्वारा रोड स्थित गुरुद्वारे में पहुंचकर मत्था टेका।
सोमवार को गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम में चेयरमैन मनोज दुबे ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और सच्चाई के मार्ग पर चलने में बिता दिया।
हम लोगों को आज संकल्प लेना चाहिए कि हम लोग भी उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज के साथ राष्ट्र को मजबूत करें। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के वक्तव्य को दोहराते हुए सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊं, तब गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं सुनाया। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता उर्फ लालू ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह सिक्ख धर्म के दसवें गुरु थे। इन्होंने ही वैशाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। खालसा पंथ की स्थापना के पीछे धर्म की रक्षा करना और मुगलों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाना था।
गुरुद्वारा ग्रंथिज्ञाना अरुण सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह के बारे में बताया कि वह एक महान योद्धा, कवि एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने मुगलों के साथ 14 युद्ध लड़े और धर्म के लिए पूरे परिवार का बलिदान कर दिया। इस अवसर पर गुरुद्वारा में एकत्रित महिलाओं ने पीवो पाहुल खंड धार होए जनम सोहेला, वाह वाह गोबिंद सिंह आपे गुरू चेला सहित कई भजन गाकर संगत को निहाल कर दिया। इस दौरान सरदार इंद्रपाल सिंह, सतिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, तनवीर सिंह टिंकू, राजिंदर सिंह, जसविंदर सिंह, जसवीर कौर, परमजीत कौर, लवलीन कौर, कमलजीत, सचिन दुबे, सर्वजीत कौर, निर्मल कौर, गुरमीत कौर, सीरत कौर आदि मौजूद रहे। संगत के बाद सभी ने लंगर छका।