कन्नौज। जनपद में ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) बढ़ता जा रहा है। दो सालों में नए केसों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। अब तक कन्नौज से कानपुर तक 330 मरीजों का इलाज चल रहा है। वर्ष 2020 में 26 नए केस मिले थे जबकि वर्ष 2021 में 35 और 2022 में यह आंकड़ा 59 पहुंच गया है। दिसंबर में यह आंकड़ा पार हो सकता है।
स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक एड्स का कारण बनता है थोड़ी सी लापरवाही। एड्स कार्यक्रमों के प्रभारी और जिला क्षय रोग अधिकारी केपी त्रिपाठी बताते हैं कि जिन मरीजों की जांच जिला अस्पताल में होती है, उनकी संख्या 180 है। कानपुर में इलाज कराने वाले कन्नौज के संक्रमितों का आंकड़ा 150 है। कानपुर में दो साल तक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर पर संक्रमितों का इलाज होने के बाद मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। एचआईवी की दवाइयां व जांच निशुल्क हैं।
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जांच के लिए पांच आईसीटीसी हैं
कन्नौज जिले में एचआईवी की जांच के लिए जिला अस्पताल, तिर्वा का राजकीय मेडिकल कॉलेज, शहर का विनोद दीक्षित अस्पताल, छिबरामऊ और हसेरन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंट्रीग्रेटेड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) की सुविधा है। एचआईवी का पटल देखने वाले अखिलेश यादव बताते हैं कि पहली और दूसरी जांच में अगर मरीज एचआईवी पॉजिटिव आता है तो तीसरी जांच कानपुर से कराकर मरीज को लिंक कर दिया जाता है। काउंसलर भी संक्रमित की मदद करते हैं। अगर मरीज खुद इलाज कराने के लिए कानपुर के लिए राजी हो जाता है तो भेज दिया जाता है, नहीं तो इसके लिए एनजीओ की सहायता ली जाती है।
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ऐसे फैलता है संक्रमण
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-संक्रमित ब्लड चढ़वाने से, संक्रमित सिरिंज से, एचआईवी संक्रमित मां से पेट में पलने वाले बच्चे में, असुरक्षित यौन संबंध से।
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ऐसे करें बचाव
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-संक्रमित सुई का प्रयोग न किया जाए।
-जांच के बाद ही ब्लड चढ़ाया जाए।
-गर्भवती की एचआईवी जांच जरूर कराई जाए।
-गर्भवती में संक्रमण की पुष्टि होने पर इलाज व किट का प्रयोग किया जाए।
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