ग्राम पंचायत अहिरूआ राजारामपुर के मजरों में विकास
के नाम पर सिर्फ ग्रामीणों से वादे होते रहे हैं। गांव में सड़क, गलियों से
चारों तरफ फैली दुर्गंध खुद ही कहानी बयां कर रही है। ग्राम पंचायत के तीन
मजरें हैं और तीनों की हालत जस की तस है। गंदगी का अंबार होने के कारण
खुली हवा में सांस लेना दूभर हो जाता है।
उस पर अब फिर ग्रामीणों को सपने
दिखाने का खेल जारी हो चुका है। इसके साथ ही किसी भी मजरे में
विद्युतीकरण नहीं होने से ग्रामीण लालटेन की रोशनी में रात बिताने को मजबूर
हैं। वहीं ग्रामीण विकास कार्यों में पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं।
अहिरूआ राजारामपुर के ग्रामीण भले ही गांव में कोई भी समस्याएं नहीं होने
की बात कहे रहे हो, पर इस ग्राम पंचायत के तीन मजरें हैं। जिसमें मजरा नगला
बरी, टीका नगला और नगला डाल है। इन सभी मजरों में समस्याओं का साम्राज्य
फैला पड़ा है। सभी मजरें कच्ची सड़कों पर जलभराव की समस्याओं से पहचाने
जाते हैं।
इन गांवों में एक भी सीसी रोड नहीं। कच्चा मार्ग आवागमन के
दुश्वार है और नालियां नहीं होने से घरों से निकलने वाला गंदा पानी दरवाजों
पर ही जमा हो जाता है। जलभराव तो गांव की प्रमुख समस्या है। गांव की
संकरी कच्ची गलियों से निकलने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता
है।
वहीं जलभराव और गंदगी से होकर निकलने को गांव के बच्चे और बूढ़े मजबूर
हैं। इसके साथ ही यह सभी मजरे विद्युतीकरण से अछूते हैं, जिससे गांव के लोग
टालटेन युग में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। सभी मजरों में सैकड़ों की
आबादी होने के बाद भी हैंडपंपों की संख्या भी काफी कम है, जिससे लोगों को
पेयजल समस्या से भी जूझना पड़ता है।
वहीं गांव में लगे कई हैंडपंपों से
गंदा और बदबूदार पानी भी आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है गांव में हैंडपंप
लगाने में भी पक्षपात किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत
अहिरूआ राजारामपुर में दो मकानों को छोड़-छोड़कर हर मकान के बाहर हैंडपंप
लगवाए गए हैं।
गांवों में हैंडपंप लगवाने में भी अनदेखी की गई है,
जिससे उन लोगों को काफी दूर लगे हैंडपंपों से पानी भरकर लाना पड़ता है।
वहीं ग्रामीणों को नालियों में पटी गंदगी खुद ही साफ करनी पड़ती है। बिना
संसाधनों के हाथों से नालियों की सफाई करना उनकी मजबूरी बन गई है।