दुर्घटनाग्रस्त हुई बस को देखते लोग।
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कन्नौज। एआरटीओ कन्नौज संजय कुमार झा यदि 10 जनवरी को डीएम की फटकार के बाद तेजी दिखाते और अवैध ढंग से सवारियां ढो रहीं टूरिस्ट बसों पर कार्रवाई करते तो शायद इतना बड़ा हादसा न होता।
छिबरामऊ-इंदरगढ़ मोटर यूनियन के पदाधिकारी मोहम्मद शाहदीन, सगीर, राजेश कुमार, राघवेंद्र सिंह, माजिद, मनमोहन और बृजेश सिंह के अलावा अशोक कुमार दुबे व अधिवक्ता शिवकुमार सिंह ने 10 जनवरी की सुबह जिलाधिकारी रवींद्र कुमार से मिलकर उनके सामने इंदरगढ़-छिबरामऊ मार्ग पर अवैध तरीके से टूरिस्ट बसों का संचालन होने, डग्गामार व अन्य वाहनों के चलने की शिकायत की थी। इन्होंने कहा था कि एआरटीओ और पुलिस विभाग की मिलीभगत से ऐसा किया जा रहा है। इससे परिवहन निगम को राजस्व का चूना लग रहा है।
अकेले इंदरगढ़-छिबरामऊ मार्ग पर 28 बसों का संचालन गलत तरीके से किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इसकी जानकारी 16 अगस्त 2019 को पूर्व राज्यमंत्री अर्चना पांडेय को भी दी थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा लेकिन संचालन बंद नहीं हुआ। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते एआरटीओ ने अवैध तरीके से सवारियां ढोने वाली बसों पर कार्रवाई की होती तो शायद 10 जनवरी की रात हुआ बस हादसा बच सकता था।