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Kannauj News: अत्यधिक दोहन से भूगर्भ जलस्तर गिरा, सदर ब्लॉक डार्कजोन घोषित

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कन्नौज। जलालाबाद और तालग्राम के बाद अब सदर ब्लॉक भी डार्कजोन घोषित कर दिया गया। ग्रीष्मकालीन मक्का और आलू की सिंचाई के लिए अंधाधुंध भूगर्भीय जलदोहन से हर साल 15-16 सेंटीमीटर जलस्तर नीचे गिर रहा है। इस कारण अब इन ब्लॉकों में निजी नलकूपों की बोरिंग पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। छिबरामऊ ब्लॉक को सेमी क्रिटिकल जोन में रखा गया है। अब इन ब्लॉकों में जल संचयन के संसाधन विकसित किए जाएंगे, जिसके लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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जिले में तालग्राम और जलालाबाद ब्लॉक को वर्ष 2015 में डार्कजोन घोषित किया गया था। इन ब्लॉकों में सिंचाई के लिए 161 करोड़ की लागत से नहर परियोजना भी स्वीकृत की गई थी। नौ साल बीतने के बाद भी नहर का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। हर साल लघु सिंचाई विभाग द्वारा सर्वे कराया जाता है, जिसमें सभी ब्लॉकों में भूगर्भीय जलस्तर की माप कर रिपोर्ट केंद्रीय भूगर्भ जल आयोग को भेजी जाती है। पिछले तीन साल के आंकड़ों को देखा जाए तो सदर ब्लॉक में भूगर्भ जलस्तर तीन मीटर तक नीचे चला गया है, जिससे इसे डार्कजोन घोषित किया गया है।
कृषि विभाग की माने तो पूरे जिले में ग्रीष्मकालीन मक्का का रकबा 64 हजार हेक्टेयर है तो अकेले सदर ब्लॉक में 29 हजार हेक्टेयर से अधिक खेती होती है। अर्थात पूरे जिले की आधी पैदावार सदर ब्लॉक में हो रही है। यही हाल आलू का भी है। यहां के किसान मक्का के बाद आलू की बोआई करते हैं, जबकि गेहूं और धान की खेती सदर ब्लॉक में कम हो रही है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता रामजी का कहना है कि जिले का भूगर्भ जलस्तर हर साल कम होता जा रहा है। सदर ब्लॉक का जलस्तर तेजी से गिरा है। जिससे यह पिछले साल क्रिटिकल जोन में आ गया था। इस बार इसे डार्कजोन घोषित कर दिया गया है। नए निजी नलकूपों की बोरिंग पर रोक लगाकर रिपोर्ट आयोग को भेजी जा रही है।
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नहीं बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

सभी सरकारी कार्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना करने का प्रावधान कई साल पहले किया गया था, लेकिन अधिकांश अधिकारियों की ओर से कवायद नहीं की गई, जिसकी वजह से सरकारी कार्यालयों में सिस्टम तैयार नहीं हो सके। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। तालाबों में बोरिंग नहीं कराई गई, जिस कारण भूगर्भीय जलस्तर ऊपर नही उठ सका।



जलस्तर गिरने से सूख गए हजारों हैंडपंप

जलस्तर गिरने की वजह से सैकड़ों हैंडपंप सूख गए। जिला पंचायत राज विभाग के अधीन ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 38 हजार हैंडपंप हैं। एक साल के दरम्यान में भूजल स्तर में आई कमी से करीब एक हजार हैंडपंपों का पानी उतर गया। वहीं, शहर में लगे 1523 हैंडपंपों में से 150 खराब पड़े हैं।



यह हैं भूजलस्तर गिरने के कारण
-ग्रीष्मकालीन मक्का और आलू में अंधाधुंध सिंचाई

- पानी का अनावश्यक अधिक मात्रा में प्रयोग

- वाहनों को धोने में पानी की बर्बादी

- घर, सड़क आदि की धुलाई में पानी की बर्बादी

- नगर पालिका, नगर पंचायतों की जलापूर्ति में लीकेज से बर्बादी

- भूजल दोहन को लेकर कोई नियंत्रण नहीं

- बरसात के पानी के संचयन के लिए व्यवस्थाएं नहीं


आंगनबाड़ी केंद्र देंगे जल संचयन का संदेश
आंगनबाड़ी केंद्रों पर जल संचयन और संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 16-16 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इसको लेकर लघु सिंचाई और बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पहले चरण में 77 आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन किया गया है। बारिश के पानी का सदुपयोग हो सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो सके। इसके लिए शासन स्तर से जल संचयन करने की व्यवस्था की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों की छतों और परिसरों से वर्षा जल एकत्र करने के लिए शोकपिट बनाया जाएगा। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर 16 हजार रुपये खर्च होंगे। डीपीओ राजेश वर्मा ने बताया कि बजट आते ही काम शुरू कराया जाएगा।
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ब्लॉक वार जलस्तर (मीटर में)
ब्लॉक 2024 2025

कन्नौज 18.40 21.10

तालग्राम 13.65 15.59

जलालाबाद 12.71 11.74

छिबरामऊ 11.46 13.67

गुगरापुर 7.45 8.94

हसेरन 9.19 9.23

सौरिख 9.82 9.98

उमर्दा 9.52 9.80
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