छिबरामऊ। नगर के गंगेश्वरनाथ मंदिर में महिलाओं ने तुलसी मैया का पूजन किया। पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने तुलसी से सुख समृद्धि की कामना की।
तुलसी पूजन के दौरान आचार्य प्रशांतानंद ने कहा कि शास्त्रों में तुलसी की महिमा का बखान है। पिछले जन्म में तुलसी का नाम वृंदा था, उन्हीं के श्राप से भगवान को शालिग्राम स्वरूप में आना पड़ा। भगवान ने तुलसी को वरदान दिया था कि बिना तुलसीदल के वह कभी भोग ग्रहण नहीं करेंगे। इसलिए बिना तुलसीदल के भगवान भोग ग्रहण नहीं करते हैं।
उन्होंने बताया कि तुलसी शालिग्राम विवाह प्रत्येक साल मनाया जाता है। विवाह को श्रद्धापूर्वक मनाने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। सनातनी परंपरा में प्रत्येक घर के आंगन में तुलसी का पौधा होना अति शुभ माना गया है। तुलसी कई असाध्य रोगों का निवारण भी करती है। इस दौरान पंडित शिवानंद, सूरजभान तिवारी, बालकराम गुप्ता, महेश वर्मा, हीरा दीक्षित, सुधा शुक्ला, मंजू दुबे, शकुंतला अवस्थी, स्नेहलता चतुर्वेदी, रानी वर्मा, मिथलेश चौहान और लक्ष्मी चौहान सहित कई लोग मौजूद रहे।
----------------
तुलसी-शालिग्राम विवाह उत्सव कल
पंडित प्रशांतानंद ने बताया कि सोमवार को मंशेश्वरनाथ मंदिर से बरात का शुभारंभ होगा। सौरिख बस स्टॉप होते हुए मां गायत्री यज्ञशाला गंगेश्वरनाथ मंदिर में तुलसी-शालिग्राम विवाह उत्सव संपन्न होगा।
--------------------------------------