सौरिख। सरदापुर स्थित एमएसए एजूकेशन सेंटर ने स्कूल वैन के पंजीकरण के अलावा मान्यता में भी फर्जीवाड़ा किया है। हादसे के बाद जब बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी जांच करने के लिए सेंटर पहुंचे तो पता चला कि स्कूल की मान्यता मदरसा शिक्षा बोर्ड से हो रही है। इसमें पढ़ाई इंग्लिश मीडियम कराई जा रही थी। बीईओ ने स्कूल के मान्यता संबंधी अभिलेख देखे और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को इसकी जानकारी दी। बीईओ ने बताया कि नियम विरुद्ध तरीके से इसमें एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से पढ़ाई की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक सरदापुर गांव स्थित एमएसए एजूकेशन सेंटर पहुंचे और प्रधानाध्यापक मोबीन अख्तर से मान्यता संबंधी अभिलेख मांगे। प्रधानाध्यापक ने जानकारी दी कि विद्यालय की मान्यता बेसिक शिक्षा परिषद से नहीं ली गई है। अभिलेखों में यह उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद से संबद्ध है। इस पर बीईओ ने सवाल पूछा कि फिर इस विद्यालय में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से किस आधार पर पढ़ाई की जा रही है। प्रधानाध्यापक ने जानकारी दी कि जिन बच्चों का एडमिशन लिया जाता है, उनका नामांकन किसी अन्य विद्यालय में कराया गया है। कोचिंग सेंटर की तरह यहां बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जिसका शुल्क अभिभावकों से लिया जा रहा है।
बीईओ ने बताया कि मदरसा जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के अधीन होता है और यह माध्यमिक स्तर में आता है। इसके पर्यवेक्षण अधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक होते हैं। नियमानुसार मदरसा में काॅन्वेंट की तर्ज पर पढ़ाई नहीं की जा सकती है। इस तरह से यह एक अमान्य विद्यालय है। इस पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। बीईओ ने बच्चों से भी इस बारे में जानकारी ली।
वाहनों के पंजीकरण में किया था खेल
एमएसए एजूकेशन सेंटर की प्रबंधक नूर सबा बेगम ने स्कूल वैन के पंजीकरण में भी खेल किया है। स्कूली वैन (मैजिक) से हादसा हुआ था, वह बच्चों को ले जाने के लिए अधिकृत नहीं थी। प्रबंधक ने पंजीकरण के समय एक शपथ पत्र दिया था, जिसमें विद्यालय के टीचिंग स्टाॅफ को ले जाने के बारे लिखा था। इसमें बच्चे ढोए जा रहे थे। हादसे के बाद एआरटीओ ने जब वाहन की जांच की तो यह खुलासा हुआ। एआरटीओ इज्या तिवारी ने बताया कि बुधवार को वह बीएसए के साथ स्कूल जाएंगीं और बिंदुवार हादसे की जांच रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंपेंगीं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जीतेंद्र कुमार ने बताया कि स्कूल की मदरसा बोर्ड की मान्यता है। वहां स्कूली वाहनों का प्रावधान नहीं है। मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है, लेकिन बच्चों का नामांकन अन्य किसी स्कूल में नहीं होना चाहिए। जांच के लिए डीएम ने एक समिति गठित की है। जांच के बाद स्कूल की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।