तिर्वा तहसील के गांव बढ़नपुर वीरहार निवासी सूरजभान उमर्दा स्थित आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में बीते कई दिनों से इस उम्मीद में चक्कर लगा रहे हैं कि शायद आज धान को हुए नुकसान का क्लेम मिल जाए। शुक्रवार को भी वह बैंक पहुंचे।
उन्होंने बैंक के बाहर इधर-उधर नजर दौड़ाई पर कहीं भी लाभार्थी किसानों की सूची नजर नहीं आई। बैंक मैनेजर से पूछा तो जवाब मिला कि अभी क्लेम का रुपया उनके पास नहीं पहुंचा है तो क्लेम का भुगतान कहां से कर दें। आखिरकार सूरजभान को मायूस होकर लौटना पड़ा।
फसल दुर्घटना बीमा योजना के तहत खरीफ की फसल के क्लेम के हकदार 3627 किसानों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। कभी किसान बैंक शाखाओं के चक्कर लगा रहे हैं तो कभी कृषि विभाग के। अफसरों व बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क कर रहे हैं।
इसके बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। 10 अप्रैल से वितरण शुरू कराकर तीन दिन में क्लेम का रुपया किसानों के खातों तक पहुंचा देने का दावा करने वाला प्रशासन 13 दिन बाद भी यह नहीं बता पा रहा है कि कितने किसानों को क्लेम मिला और कितने शेष बचे हैं।
इस संबंध में उप निदेशक कृषि डा. राजेश कुमार ने कहा कि बीमा कंपनी ने जानकारी दी है कि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की नोडल शाखा को क्लेम की धनराशि भेजी जा चुकी है। यदि उमर्दा शाखा में क्लेम का रुपया नहीं पहुंचा तो इसके लिए नोडल बैंक जिम्मेदार है।
शनिवार को लीड बैंक मैनेजर से इस मुद्दे पर वार्ता करेंगे। उप कृषि निदेशक ने कहा कि कमिश्नर की बैठक के दौरान एलडीएम ने जानकारी दी है कि बैंकों ने क्लेम बांटने का काम शुरू कर दिया है। बैंक आफ बड़ौदा की शाखाओं ने किसानों के खाते में रुपया भेज भी दिया है। अब वह क्रास चेक कराकर पता करेंगे कि किसानों के खाते में क्लेम का रुपया ट्रांसफर हुआ कि नहीं।
उप निदेशक से जब पूछा गया कि अब तक कितने किसानों को खरीफ का क्लेम भुगतान हो चुका है ? तो वे कोई संख्या नहीं बता पाए। बैंक शाखाओं के बाहर सूची न चस्पा होने के मुद्दे पर कहा कि ऐसा करना बैंक का काम है। यदि बैंकें ऐसा नहीं कर रही हैं तो एलडीएम कार्रवाई करें।
खाते में क्लेम नहीं पहुंचा तो बैंक जिम्मेदार
एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रतिनिधि अभिषेक यादव ने बताया कि जिले के 3627 किसानों को भुगतान करने के लिए 16172848 रुपया नोडल बैंक शाखाओं को दस दिन भेजा जा चुका है। किसानों की सूची बीमा कंपनी के पास नहीं है। वह बैंक शाखाओं में ही उपलब्ध है।
क्लेम का भुगतान करना अब बैंकों की जिम्मेदारी है। यदि किसानों के खाते में क्लेम का रुपया नहीं पहुंचा है तो उसके लिए सीधे तौर पर बैंकों के अधिकारी जिम्मेदार हैं। क्योंकि नोडल बैंक के जरिए बीमा कंपनी को प्रीमियम मिला था। बदले में क्राप कटिंग रिपोर्ट में नुकसान के आधार पर क्षतिपूर्ति का रुपया नोडल बैंक में पहुंचा दिया गया है।
बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को लगाई फटकार
कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को डीएम अनुज कुमार झा ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि लोकेश को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि वे तत्काल राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ रबी में हुए नुकसान की सर्वे रिपोर्ट तैयार कराएं। देरी किसी भी सूरत में न करें। बहानेबाजी न करें।
खरीफ के क्लेम वितरण की छानबीन कराई जा रही है। लेटलतीफी के लिए जिस स्तर पर भी लापरवाही मिलेगी उसे गंभीरता से लेंगे। भुगतान में देरी करने वाले चाहें बैंक अफसर हों या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही ठोस कार्रवाई नजर आएगी। ताकि किसानों को क्लेम का रुपया मिल सके।
- अनुज कुमार झा, डीएम, कन्नौज।
फसल बीमा के क्लेम की धनराशि अभी बैंक खाते में नहीं आई है। उन्हें रीजनल आफिस से यह रुपया मिलना है। जो किसान आ रहे हैं उन्हें ऊपर से ही बीमा धनराशि न आने की बात बताई जा रही है। जैसे ही रीजनल आफिस से रुपया मिल जाएगा। किसानों के खाते में ट्रांसफर करा देंगे।
-एके द्विवेदी, प्रबंधक, आर्यावर्त बैंक, उमर्दा।
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