कन्नौज। जिले में लगातार पड़ रहे कोहरे और पाले के कारण आलू की फसल को भारी नुकसान हुआ है। अनुमान है कि दस फीसदी फसल झुलसा और परपरा रोग की चपेट में आ चुकी है। कुल 54 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की गई है जिसमें पछेती आलू की फसल में नुकसान की संभावना अधिक है। पहले ही मंदी की मार झेल रहे किसानों के लिए यह मौसम की मार दोहरी चिंता का कारण बन गई है।
जनवरी में अत्यधिक पाले के कारण आलू के पौधों की पत्तियां किनारों से सूखने लगी हैं। बीते दिनों मौसम में नमी और धूप न निकलने से पछेती झुलसा रोग सक्रिय हो गया है। तिर्वा, उमर्दा और जलालाबाद जैसे क्षेत्रों में कई एकड़ आलू की फसल प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, बेलें झुलसने से आलू का आकार नहीं बढ़ पा रहा है। इस कारण लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कई जगहों पर आलू की बेल पूरी तरह काली होकर जमीन पर गिर गई है। पाले के कारण पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से परपरा रोग भी जड़ों को प्रभावित कर रहा है। किसानों ने बताया कि भारी निवेश के बावजूद अच्छी पैदावार की उम्मीद पर मौसम के बदले मिजाज ने पानी फेर दिया है।
कृषि विभाग के सुझाव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि जिले में दस फीसदी आलू की फसल में परपरा का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसका सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत में नमी बनाए रखें, क्योंकि इससे झुलसा जैसे रोगों का असर कम होता है। इसके लिए समय-समय पर हल्का पानी लगाना फायदेमंद होगा। पानी लगने के पांच-छह दिन तक दवा का असर बना रहता है। इसके अतिरिक्त, खेत के किनारे धुआं करने से भी रोग का प्रभाव कम किया जा सकता है, बशर्ते प्रदूषण का ध्यान रखा जाए। उन्होंने बताया कि कोहरे में झुलसा रोग का खतरा बढ़ता है, जबकि कोहरे के साथ गलन होने पर पाले का असर होता है, जिससे परपरा रोग पनपता है।