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बर्खास्त 34 शिक्षकों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

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कन्नौज। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में बीएड की योग्यता हासिल कर सहायक अध्यापक पद पर नौकरी पाने वाले 28 शिक्षकों की एसआईटी (विशेष अनुसंधान दल) की जांच में बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई। इसके बाद शिक्षकों को नोटिस जारी कर बर्खास्त कर दिया गया। वहीं वर्ष 2010 में विशिष्ट बीटीसी के तहत सहायक अध्यापक की नौकरी पाने वाले छह शिक्षकों के कागजात जांच के दौरान फर्जी पाए गए। इन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। इन सभी के खिलाफ अभी तक संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। 22 जनवरी को प्रमुख सचिव के साथ हुई वीडियो कांफ्रेंस में एफआईआर दर्ज नहीं होने की जानकारी पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। बीएसए ने समस्त खंड शिक्षाधिकारी व नगर शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराकर रिपोर्ट दें। ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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बर्खास्त होने वाले शिक्षकों में कन्नौज ब्लाक से दो, हसेरन से एक, सौरिख से चार, उमर्दा से चार, जलालाबाद से एक, गुगरापुर से एक, छिबरामऊ से पंद्रह, तालग्राम से छह शिक्षक शामिल हैं। डॉ.भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से वर्ष 2014-15 में बीएड की फर्जी डिग्री हासिल कर जिले में 28 शिक्षकों ने सहायक अध्यापक पद पर नौकरी हासिल की है। एसआईटी की जांच के बाद इन सभी शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
शासन के निर्देश पर गठित त्रिस्तरीय कमेटी में शामिल अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, एडी बेसिक की जांच में वर्ष 2010 में सहायक अध्यापक पर नौकरी पाने वाले छह शिक्षक और चिह्नित हुए थे। इनमें चार शिक्षकों के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के अंकपत्र व दो शिक्षकों के टीईटी के प्रमाण पत्र फर्जी निकले थे। इन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया था। इन सभी के खिलाफ अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। बीएसए केके ओझा ने बताया कि सभी बीईओ व नगर शिक्षाधिकारी को पत्र जारी कर बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
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दूसरे दिन भी शिक्षा विभाग नहीं दे पाया जांच रिपोर्ट
छिबरामऊ। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लेट लतीफी का आलम यह है कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट दूसरे दिन भी कोतवाली पुलिस को नहीं सौंपी गई। इससे बर्खास्त दस शिक्षकों के खिलाफ दूसरे दिन भी मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया। एसआईटी लखनऊ की जांच में ब्लाक क्षेत्र में विभिन्न विद्यालयों में दस शिक्षक ऐसे पाए गए, जिन्होंने बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी हासिल की थी। इन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। बीएसए केके ओझा के निर्देश पर सभी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए बीईओ सुनील कुमार दुबे को निर्देशित किया गया था। शुक्रवार की सायं बीईओ ने प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र मिश्रा को सभी दस शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करवाने के लिए तहरीर दी। कोतवाल ने तहरीर के साथ एसआईटी की जांच रिपोर्ट मांगी। इसे मुहैया नहीं करवाया गया। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिलते ही मुकदमा पंजीकृत करवा दिया जाएगा। वहीं बीईओ सुनील दुबे ने बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट मुख्यालय से मंगवाई गई है।
महकमे की लापरवाही, ले लिया था स्थगनादेश
सितंबर माह में तत्कालीन बीएसए दीपिका चतुर्वेदी ने भी इन शिक्षकों को बर्खास्त कर मुकदमा पंजीकृत करवाने के निर्देश दिए थे। तब शिक्षा विभाग मुकदमा पंजीकृत करवाने के लिए पूरे अभिलेख उपलब्ध नहीं करवा पाया था। विभागीय लापरवाही का लाभ बर्खास्त शिक्षकों ने उठाया और न्यायालय से बर्खास्तगी पर स्थगनादेश प्राप्त कर लिया। न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में बीएसए ने सभी शिक्षकों की पुन: तैनाती के आदेश जारी किए थे।
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