छिबरामऊ(कन्नौज)। बेसहारा गोवंशों को आश्रय देने के लिए नगला दिलू में बनवाया गया गो संरक्षण केंद्र बदहाल है। एक सप्ताह से दाने का इंतजाम नहीं है। ऐसे में गोवंश सूखा भूसा खाने के लिए मजबूर हैं। उपचार न मिलने सेे दो गोवंश तड़प रहे हैं।
नगला दिलू गांव में बनी गोशाला में 127 गोवंश बंद हैं। इन गोवंश को सूखा भूसा दिया जा रहा है। दाना एक सप्ताह पहले खत्म हो चुका है। केयर टेकर अनिल ने बताया कि भूसा भी आज (मंगलवार) शाम तक के लिए ही बचा है। दो गोवंश चार दिन से बीमार हैं। पशु चिकित्साधिकारी कभी-कभी ही आते हैं। गोशाला में बाउंड्रीवाल न होने से गोवंश कंटीले तारों को पार कर खेतों तक पहुंच जाते हैं। बीडीओ मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि पंचायत सचिव को व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। गोशाला में भूसा और दाना का इंतजाम भी करा दिया गया है।
48 घंटे से नहीं मिला गोवंशों को उपचार
गो संरक्षण केंद्र में चार दिन पहले दो गोवंश बीमार हो गए थे। बताया गया कि एक गोवंश को सांड़ ने घायल कर दिया था। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन सिंह ने रविवार को उपचार किया था। इसके बाद कोई भी मौके पर नहीं गया। 48 घंटे से दो गोवंश उपचार के बिना तड़प रहे हैं।
विजिट बुक सहित कोई भी अभिलेख नहीं
गो संरक्षण केंद्र पर विजिट बुक सहित कोई भी अभिलेख नहीं है। बताया गया कि अभिलेखों को पशु चिकित्साधिकारी अपने साथ रखते हैं।
डीएम के आदेश पर तालाब खुदा, पानी नहीं भरा
गो संरक्षण केंद्र को शुरू कराते समय जिलाधिकारी ने यहां तालाब को खुदवाकर पानी भरवाने के निर्देश दिए थे। तालाब को खुदवा दिया गया। पानी नहीं भरवाया गया।
केयर टेकर को पांच माह से नहीं मिला मानदेय
केयर टेकर अनिल ने बताया कि यहां पांच माह हो गए हैं। अभी तक मानदेय नहीं मिला है। कई बार अधिकारियों से मानदेय दिलाने की गुहार लगाई। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
भूसे के साथ गोबर भी खाते गोवंश
वृहद गो संरक्षण केंद्र के निर्माण के समय कार्यदायी संस्था ने घोर अनियमितताएं बरतीं। गोवंशों के लिए बनवाई गईं चरनियां काफी नीची हैं। गोवंश इनमें खड़े होकर भूसा खाते हैं। इन्हीं में गोबर कर देते हैं। भूसे के साथ इसे भी खा लेते हैं।