आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की जांच शुरू हो गई है। इसके लिए सब रजिस्टार व तहसीलदारों को लगाया गया। अधिसूचना जारी होने से एक वर्ष पहले, बाद के गाटा संख्या में हुए बदलाव, भूमि को अकृषक की श्रेणी में लाने के मामले की जांच की जाएगी। जिन किसानों की यह भूमि थी, उनसे औने-पौने दामों में जमीन खरीद ली गई हो। जिला प्रशासन ने करीब 8500 किसानों को पांच अरब के भुगतान का ब्योरा मांगा है।
ज्ञात हो कि कन्नौज जिले से 72 किलोमीटर की परिधि में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे निकला है। इस प्रोजेक्ट में जमीन देने वाले किसानों को सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा प्रदेश सरकार की ओर से दिया गया था। तमाम ऐसे किसान ऐसे हैं जिनकी इस प्रोजेक्ट में पूरी जमीन चली गई। प्रशासन के आंकड़े पर यदि नजर दौड़ाए तो कन्नौज जिले में लगभग साढ़े आठ हजार किसानों की जमीन का एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहण हुआ था। किसानों से साढ़े सात सौ हेक्टेयर जमीन ली गई। जिसका सरकार ने लगभग पांच अरब रुपये का भुगतान सरकार के पक्ष में बैनामा कराकर उनके खातों में किया।
कोट
सरकार से जारी निर्देशों के बाद ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में अधिसूचना जारी होने के एक वर्ष पहले व बाद में किसी खास व्यक्ति को ओर से खरीदी गई जमीन का ब्यौरा खंगाला जा रहा है। देखा जाएगा कि खरीदी गई भूमि को अकृषक घोषित कराकर आबादी रेट का भुगतान तो नहीं लिया गया है। अन्य तमाम बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। तीनों तहसीलों के सब रजिस्टार व तहसीलदार को जांच में लगाया गया है। आगे शासन से जो भी निर्देश मिलेंगे उसके आधार पर जांच होगी।
- संतोष कुमार वैश्य (एडीएम, कन्नौज)