छिबरामऊ। नहर विभाग की लापरवाही के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। नहर में एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार छोड़े गए पानी से इलाके 200 बीघे फसल जलमग्न हो गई है। किसानों के विरोध के बाद भी देर रात तक विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे थे।
बेवर से जलालाबाद तक 27 किलोमीटर लंबी नहर में सात माइनर है। रविवार की दोपहर बाद कसावा, नथा नगला तथा भाउलपुर में अचानक छोड़े गए पानी से खड़ी फसलें जलमग्न हो गई। खेतों में पानी भरने से रोकने के लिए नथा नगला में किसानों ने नहर को बांधने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उसके बाद नथा नगला के खेतों से होता हुआ पानी भाउलपुर गांव में घुस गया। कुछ ही देर में चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि नहर विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा पर फोन नहीं उठे। इन दिनों खेतों में आलू, गेहूं, चंना आदि की फसलें खड़ी है, सभी पानी में डूब गई। भाउलपुर गांव के जगन्नाथ की 6 बीघे, रामनारायन जाटव की 10 बीघे, रामनाथ पाल की 12 बीघे, लालराम पाल की 8 बीघे, राजेश जाटव की तीन बीघे, नथा नगला में रामऔतार, सुमन देवी, संजय सिंह, मान सिंह की तीन- तीन बीघे, ज्ञानेंद्र सिंह की दो बीघा फसल जलमग्न हो गई।
इस संबंध में नहर विभाग के सींचपाल शमीम सिद्दीकी ने बताया कि अभी इस नहर की किसी को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। सोमवार को टीम लगाकर पानी रोकने की व्यवस्था की जाएगी।
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रूपपुर गांव में बांधी गई नहर
किसान महेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि रूपपुर तथा चंदरपुर के किसानों ने अपनी फसल डूबे से बचाने के लिए नहर को बांध दिया है, जिसके कारण नथा नगला तथा भाउलपुर की फसलें डूब गई है। नथा नगला तथा भाउलपुर के किसानों ने नहर को दुरुस्त कराने और फसलों को नुकसान के मुआवजे की मांग डीएम शुभ्रांत शुक्ला से की है।