डॉ. डीएस मिश्रा से जानकारी लेते भाजपाई।
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छिबरामऊ(कन्नौज)। सौ शय्या अस्पताल में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री का वरिष्ठ परामर्शदाता डॉक्टर डीएस मिश्रा से संवाद का मामला तूल पकड़ रहा है। डॉक्टर के समर्थन में भाजपा नेता खड़े हो गए हैं। भाजपाइयों ने इस मामले में सीएमएस को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं पूर्व राज्यमंत्री अर्चना पांडेय ने टिप्पणी को गलत बताया है।
पूर्व राज्यमंत्री अर्चना पांडेय ने कहा कि सरकारी डॉक्टर डीएस मिश्रा के साथ गई अभद्रता पूर्व मुख्यमंत्री की मानसिकता का परिचय दे रही है। बुधवार को अपने आवास पर पत्रकारों को लिखित में दिए गए वक्तव्य में उन्होंने कहा कि 10 जनवरी को दुखद दुर्घटना के चार दिन बाद आए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजनीति करने से बाज नहीं आए। जिस फायर स्टेशन के बंद होने का उन्होंने जिक्र किया, वह सुचारु रूप से चल रहा है। पहली गाड़ी उसी फायर स्टेशन से आग बुझाने को पहुंची थी। उन्होंने कहा कि भाजपा संस्कारित व अनुशासित पार्टी है। हमेशा मर्यादा में रहकर पक्ष या विपक्ष में भूमिका का निर्वहन करती है। 100 शय्या अस्पताल में सरेआम एक सरकारी कर्मचारी से अभद्रता और उन्हें बीजेपी व आरएसएस का एजेंट बताना अशोभनीय है।
भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक डॉक्टर प्रत्यूष दुबे, डॉक्टर शिवम अग्निहोत्री तथा पूर्व जिला उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने बुधवार को 100 शय्या अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से जानकारी की। सीएमएस डॉक्टर कुलदीप यादव,डॉक्टर डीएस मिश्रा, अस्पताल के अन्य डॉक्टरों तथा कर्मचारियों से वार्ता करने के बाद भाजपा नेताओं ने लिखित रूप से दिए गए वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री के डॉक्टर डीएस मिश्रा से की गई अभद्रता के पीछे सीएमएस डॉक्टर कुलदीप यादव का प्री प्लान बताया। भाजपा नेताओं ने कहा कि इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले डॉक्टर को बाहर निकालना तथा भाजपा व आरएसएस का एजेंट बताना गलत है। डॉक्टर किसी पार्टी का नहीं होता है। भाजपाइयों ने डॉक्टर के साथ की गई अभद्रता की निंदा की है।