फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डाक्टरों की हड़ताल, मरीज और तीमारदार परेशान

Thu, 24 Aug 2017 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
विज्ञापन
ओपीडी गेट पर धरना देते डाक्टर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
राजकीय मेडिकल कालेज में संविदा पर कार्यरत 65 चिकित्सकों की गुरुवार को रही हड़ताल से मेडिकल कालेज की व्यवस्थाएं पंगु हो गईं। यद्यपि फैकल्टी चिकित्सकों व इंटनशिप कर रहे 50 मेडिकल स्टूडेंट्स के जरिए ओपीडी व जनरल वार्ड की व्यवस्थाएं संभालने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद भी मरीजों को राहत नहीं मिली। कई विभागों में डाक्टरों के न होने से मरीज परेशान रहे। कई मरीजों ने अपनी समस्याएं सीएमएस व प्राचार्य को बताई।
विज्ञापन
वेतन न मिलने से खफा जूनियर व सीनियर डाक्टर सुबह नौ बजे एकजुट होकर ओपीडी के गेट पर धरना देकर बैठ गए। इस दौरान तमाम मरीज इन डाक्टरों के पास पहुंचे पर डाक्टरों ने मरीजों को देखने से इंकार कर दिया। गुरुवार को इमरजेंसी में कार्यरत करीब आधा दर्जन जेआर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इस वजह से यहां भी फैकल्टी चिकित्सकों व इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल स्टूडेंट्स की ड्यूटी लगाई गई। कई गंभीर मरीजों को डाक्टर उपलब्ध न होने की वजह से रेफर कर दिया गया। करीब दो घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया ने हड़ताल पर बैठे सभी डाक्टरों को सीएमएस कार्यालय में बुलवाकर समझाने का प्रयास किया। बताया कि शासन स्तर पर सचिव स्तर के अधिकारियों के फेरबदल हो जाने से वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। करीब एक घंटे तक चली वार्ता के बाद डाक्टरों ने प्राचार्य से लिखित आश्वासन मांगा। इस पर प्राचार्य ने कोई निर्धारित तिथि तक वेतन भुगतान का लिखित आश्वासन देने से इंकार कर दिया। इस पर डाक्टरों ने प्राचार्य की बात नहीं मानी। सभी वापस धरने पर बैठ गए। दोपहर दो बजे तक सभी डाक्टरों का धरना जारी रहा।
विज्ञापन
धरने पर डा. शैलेंद्र, डा. रिजवान, डा. देवर्षि गुप्ता, डा. सुभाष चंद्रा, डा. अनिल यादव, डा. तलत सिद्दीकी, डा. इफसा सामी, डा. निशांत मिश्र, डा. अंशुमान, डा. प्रवीन, डा. शिवानंद, डा. विवेक, डा. मारकंडेय, डा. दिनेश, डा. शरद, डा. अभिषेक, डा. जितेंद्र, डा. नेहा, डा. यतींद्र, डा. विमलेंद्र, डा. सोमेश, डा. अंकिता, डा. हिमांश गुप्ता, डा. विपिन, डा. श्वेता, डा, प्रगति शर्मा, डा.राहुल चतुर्वेदी, आदि रहे। -------------------- हड़ताल से मायूस मरीजों का छलका दर्द तिर्वा। डाक्टरों की हड़ताल से मरीजो को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सीएमएस कार्यालय के बाहर मौजूद तिर्वा कस्बे के अशोक नगर मोहल्ला निवासी नीतू (25) पत्नी सुशील ने बताया कि उसके गले में टांसिल हो गया था। यहां डाक्टर को दिखाने आई थी पर डाक्टर केबिन में मौजूद नहीं मिले। तालग्राम थाना क्षेत्र के बिरौली गांव की रईशा (35) पत्नी आशिक के कान में दर्द था। उसे भी उपचार नहीं मिला। इसी तरह से इंदरगढ़ थाना के रामपुर बिनौरा गांव निवासी दीपक (20) व तिर्वा कस्बा निवासी सीमा (25) पत्नी ओमप्रकाश के कान व नाक में दिक्कत थी। उनको भी ईएनटी में कोई डाक्टर नहीं मिला। ठठिया थाना क्षेत्र के रूरा गांव निवासी इस्लामन (45) पत्नी इब्राहिम कान का उपचार कराने आई थी। बछज्जापुर गांव की सायरा (6) पुत्री नौशाद खून की जांच कराने के लिए आई थी। इसी तरह हरदोई जिले के मल्लावां थाना क्षेत्र के हरेईपुर्वा गांव निवासी सुधा पत्नी अमर सिंह के सर में दर्द था। उसे भी संबंधित विभाग का डाक्टर नहीं मिला। सभी परेशान होकर सीएमएस कार्यालय पहुंचे। यहां अपनी शिकायते दर्ज कराई। आर्थो, ईएनटी, सर्जरी, गाइनी व बाल रोग की सेवाएं रहीं बाधित तिर्वा। हड़ताल से सबसे अधिक प्रभाव आर्थो, सर्जरी, ईएनटी, बाल रोग व गाइनी विभाग पर पड़ा। आर्थो विभाग के सभी जेआर व एसआर हड़ताल पर थे। डाक्टरों का पूरा केबिन खाली पड़ा था। सर्जरी विभाग में सर्जन डा.आईए अंसारी ने करीब दो घंटे तक मरीजों का उपचार किया। बाद में वह ओटी में चले गए। इसके बाद आए मरीज परेशान घूमते रहे। गाइनी विभाग में एचओडी डा. रेनू, कन्नौज मेडिकल कालेज के अलावा कानपुर मेडिकल कालेज से भी संबद्ध है। उनके मौजूद न होने पर गाइनी विभाग में चार इंटर्नशिप कर रहे डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई। ईएनटी विभाग में एचओडी डा. संदीप कौशिक भी तीन दिन कानपुर मेडिकल कालेज से संबद्ध है। ईएनटी सर्जन डा.अशरफ गुरुवार को पूरे दिन ओटी में व्यस्त रहे। इस वजह से ओपीडी का वार्ड खाली पड़ा रहा। करीब 50 मरीज भटकते रहे। मरीजों की उमड़ी भीड़ पर हुए मायूस तिर्वा। मेडिकल कालेज की ओपीडी में गुरुवार को 817 नए मरीजों का पंजीकरण किया गया। 110 मरीज पुराने पर्चे के साथ आए। इस तरह से 927 मरीजों का पंजीकरण हुआ। ओपीडी के मेडिसिन विभाग में एचओडी डा. वीपी प्रियदर्शी अपने दो सहयोगियों के साथ मरीजों का उपचार करते रहे। इसी तरह बाल रोग विभाग में डा.नरेंद्र त्रिपाठी ने मरीजों को देखा। इसके बावजूद मरीज बिना डाक्टरों को दिखाए ही लौट गए। यही हाल इमरजेंसी वार्ड का रहा। यहां इमरजेंसी इंचार्ज डा. शादाब के नेतृत्व में चार इंटर्नशिप डाक्टरों की ड्यूटी लगी थी। कई गंभीर मरीजों को यहां से रेफर होना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें