कसावा चौकी क्षेत्र के पूर्वी मडै़या गांव में दो पक्षों में हुए जातीय संघर्ष के मामले में प्रथम दृष्टया पुलिस की लचर कार्रवाई ही सामने आई है। 15 दिन पहले बच्चे के साथ हुई मारपीट की घटना में यदि पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की होती तो दोबारा इस तरह की वारदात को अंजाम नहीं दिया जाता। अब भी पुलिस इस मामले में दिन भर लीपापोती में जुटी रही। पीड़ित ने जब दबंगों के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया तो पुलिस ने दूसरे पक्ष की तरफ से भी मुकदमा दर्ज करवा दिया।
कसावा पुलिस चौकी क्षेत्र के पूर्वी मड़ैया गांव के गंगाराम ने गांव के रामनिवास, राजू, वेदराम, रामबहादुर, किशनलाल, सतीश, अवधेश, रामऔतार, दिनेश व भारापुर निवासी अशोक कुमार के खिलाफ दलित उत्पीड़न के तहत मामला दर्ज कराया है। इस मामले में पुलिस ने आगजनी की धारा नहीं लगाई है। सूत्रों की मानें तो चौकी इंचार्ज रणविजयबहादुर सिंह ने पीड़ित को धमकाया और दूसरी तहरीर दिलवाई, जिसमें आगजनी की बात नहीं लिखाई गई। आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस ने दूसरे पक्ष की तहरीर पर भी मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसमें ग्राम पूर्वी मड़ैया निवासी लालाराम ने रामनिवास, राहुल, गंगाराम, विनोद व जितेंद्र (सभी नट समुदाय के) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
पुलिस ने इस मामले में गांव से आठ आरोपियों को भी उठा लिया था, लेकिन किसी का भी चालान नहीं किया गया और पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया। इस मामले में समझौते के लिए दिनभर कई भाजपा नेता और गणमान्य लोग कोतवाली में डेरा जमाए रहे।
कोतवाल राजबहादुर सिंह ने बताया कि यह सुनने में आया है कि दोनों पक्षों में आपसी समझौता हो गया है। दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज है और पूछताछ के लिए गांव के कुछ लोगों को उठाया गया है। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
वर्जन
पूर्वी मड़ैया गांव में हुए मामले की जांच सीओ छिबरामऊ को सौंपी गई है। इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा। यदि कोतवाली पुलिस की भूमिका संदेहजनक है तो इसकी भी जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - दिनेश कुमार पी-पुलिस अधीक्षक कन्नौज।