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देवी को भेंट किए बकरे को जख्मी करने पर भड़के लोग

Wed, 11 Jul 2018 12:00 AM IST
kannauj
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ग्रामीणों को समझाती पुलिस। - फोटो : amarujala
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जलालपुर (कन्नौज)। मन्नतें पूरी करने और गांव में सुख समृद्घि के लिए मां काली को भेंट स्वरूप बकरे को अराजकतत्वों ने जख्मी कर दिया। जख्मी बकरे को लेकर पड़ोसी गांव पहुंचे एक गांव के ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचने पर दो गांवों के बीच तनाव बढ़ गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित लोगों को शांत कराया। घटना से आहत ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस के अनुसार बकरे ने रैगावां की एक महिला पर हमला कर दिया था। इस महिला के पुत्र ने बकरे पर तसला मार दिया। इससे वह जख्मी हुआ था। शरारती तत्वों ने मामले को तूल देने का प्रयास किया। मामले को शांत करा दिया गया है। किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है।  
  तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के गांव रामपुर निवादा में एक प्राचीन मंदिर है। गांव के लोग मन्नतें पूरी होने और सुख-समृद्घि की कामना से बकरा मां काली को भेंट कर छोड़ देते हैं। मंगलवार को पड़ोसी गांव रैगावां में रहने वाले कुछ लोगों ने बकरे को पकड़ कर जख्मी कर दिया। बकरा खून से लथपथ हो गया। इसकी जानकारी होते ही रामपुर निवादा के ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। जख्मी हालत में बकरे को लेकर करीब दो सौ लोग रैगावां पहुंच गए और हंगामा व नारेबाजी करने लगे। इससे दोनों गांव के लोगों के बीच तनाव बढ़ गया। मौके पर पहुंची यूपी 100 टीम ने आक्रोशित लोगों को शांत कराया। रामपुर निवादा में रहने वाले ग्रामीण निर्देश कुमार, घंटीलाल, बृज किशोर, अजय कश्यप ने बताया कि 2016 में यह बकरा मां काली को भेंट किया गया था। तब से बकरा गांव में आजाद घूम रहा है। धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने की मंशा से बकरे को जान से मारने का पड़ोसी गांव के कुछ लोगों ने प्रयास किया। आरोपियों के खिलाफ यदि कार्रवाई न हुई तो वह लोग प्रदर्शन करेंगे। कोतवाली प्रभारी शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि मौके पर पहुंचकर दोनों गांव के लोगों को बैठाकर मामला शांत करा दिया गया है। शांति व्यवस्था व अफवाह फैलाने वाले लोगों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  
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दशकों पुरानी परंपरा आज भी जारी  
जलालपुर। रामपुर निवादा के प्राचीन मंदिर में मन्नत पूरी होने और गांव में सुख शांति के लिए मां काली को बकरा भेंटकर आजाद छोड़ने की परंपरा दशकों बाद भी जारी है। ग्रामीण बकरे को मां काली को भेंट करने के बाद उसे आजाद छोड़ देते हैं। बकरे से धार्मिक आस्था जुड़ी होने के कारण ही बुधवार को यह विवाद सामने आ गया।  
 
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