कोतवाली क्षेत्र के ग्राम लड़ैता में हत्यारोपी सिपाही के परिजन घर में ताला डालकर फरार हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले माह सिपाही का पत्नी के साथ विवाद हुआ था, जो पुलिस तक पहुंचा था। बाद में मृतका के मायके पक्ष के लोग उसे अपने साथ लेकर चले गए थे। इस वजह से पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी।
ग्राम लड़ैता निवासी सिपाही सनोज यादव ने कानपुर में चार दिन पहले अपनी पत्नी अर्चना यादव की हत्या कर दी थी। उसके खिलाफ हत्या का मामला पुलिस ने दर्ज किया है। इस घटना के बाद से सनोज यादव फरार चल रहा है, जबकि उसके माता-पिता सहित अन्य परिजन शनिवार की सुबह मकान में ताला डालकर कहीं चले गए।
ग्रामीणों के मुताबिक सिपाही सनोज यादव और उसकी पत्नी के बीच अनबन रहती थी और 29 जनवरी को दोनों के बीच विवाद भी हुआ था। जिसमें सिपाही ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट की थी, जिससे उसका सिर फट गया था। सूचना पर 100 नंबर पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों को कोतवाली ले आई थी, लेकिन अर्चना ने घटना की तहरीर नहीं दी थी। इस वजह से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
वहीं, जानकारी पाकर जब अर्चना के पिता भरथना इटावा निवासी ओम शिवाय यादव गांव पहुंचे तो सिपाही के परिजनों ने उनके साथ भी अभद्रता की थी। इस पर वह अपनी बेटी को लेकर चले गए थे। हत्या से तीन दिन पहले ही सनोज अपनी पत्नी को लेकर कानपुर गया था। ग्रामीणों ने बताया कि सनोज के पिता तहसील छिबरामऊ में संग्रह अमीन के पद पर तैनात हैं और वह पिछले तीन सालों से मुंह के कैंसर से पीड़ित चल रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जब सनोज पांच साल का था तभी उसकी मां रामदेवी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी सौतेली मां आशा देवी घर पर पिता के साथ रहती हैं। सनोज का पांच साल का बेटा हर्षित भी अपने दादी-बाबा के साथ ही गांव में रहता है। मई 2010 में उसकी शादी अर्चना के साथ हुई थी और 2011 में उसकी नौकरी नागरिक पुलिस में सिपाही के पद पर लगी थी। वर्तमान में उसकी तैनाती जिला जालौन में थी, लेकिन वह डीआईजी आफिस कानपुर में संबद्ध था और कानपुर के थाना कल्याणपुर अंतर्गत बिनुआपुर में किराए के मकान में रह रहा था।
अवैध संबंधों में हत्या का शक
सिपाही सनोज यादव और उसकी पत्नी अर्चना यादव के बीच अनबन की वजह साफ नहीं हो रही है। ग्रामीणों में चर्चा है कि अवैध संबंधों के शक में सिपाही ने अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। वैसे ग्रामीणों का कहना है कि अर्चना काफी होनहार थी और वह एमए बीएड के बाद नेट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इसी सिलसिले में वह दिल्ली में एक हास्टल में रहकर तैयारी कर रही थी। उसके पिता एक इंटर कालेज के प्रिंसिपल थे। इसी वजह से उसके घर में शैक्षिक माहौल अच्छा था।