एक साल पूर्व कन्नौज और फर्रुखाबाद जिले में जरायम की दुनिया में चर्चित रहने वाली हिस्ट्रीशीटर मीरा जाटव की मौत से जुड़ी फाइलों को फिर से खोला जाएगा। मीरा के पिता की फरियाद पर मानवाधिकार आयोग की टीम जिले में डेरा डालकर उस पर दर्ज लूटपाट के मुकदमे व उसकी मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। पुलिस अभिरक्षा में हुई महिला की मौत की जांच से उसकी हत्या के आरोप में फंसे बसपा नेता समेत उसके पुत्र व पुलिस कर्मचारियों की परेशानी बढ़ सकती है।
कोतवाली गुरसहायगंज क्षेत्र के गांव निवासी 27 वर्षीय मीरा जाटव पर फर्रुखाबाद जिले के फतेहगढ़ व कमालगंज थाना और कन्नौज की गुरसहायगंज कोतवाली में आधा दर्जन से अधिक लूट, चोरी व धमकी देने के मामले दर्ज थे। 30 अप्रैल 2016 की रात को कमालगंज थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी सालिगराम ने मीरा जाटव को नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। उसी रात को बोलेरो से जेल ले जाते समय महिला आरक्षी नारायणी देवी को धक्का देखकर मीरा ने छलांग लगा दी। जिससे वह घायल हो गई। 09 मई की सुबह करीब 10 बजे कानपुर के हैलट अस्पताल में पुलिस अभिरक्षा के दौरान मीरा जाटव ने दम तोड़ दिया था।
मीरा जाटव के पिता ने थाना प्रभारी सालिगराम वर्मा समेत फर्रुखाबाद के बसपा नेता महेंद्र कटियार व उनके पुत्र गुरदीप कटियार व नारायणी देवी और सिपाही अंकेश कटियार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया था। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से पूर्व मीरा जाटव ने बसपा नेता के पुत्र गुरदीप कटियार व उसके एक साथी पर अपहरण कर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। मीरा व उसके परिवार का आरोप था कि बसपा नेता के दबाव में कमालगंज थाना प्रभारी ने उसे झूठे मामलों में फंसा कर कई बार जेल भेजा था। 30 अप्रैल को गिरफ्तार कर उसे चलती कार से नीचे फेंक कर उसकी हत्या का प्रयास किया था।
मीरा की मौत के बाद उसके पिता ने मानवाधिकार आयोग दिल्ली पहुंच कर उसकी पुत्री के साथ हुए अत्याचार व उसकी हत्या के मामले की जांच की फरियाद की थी। इससे आयोग ने मानवाधिकार आयोग की अधिकारी मोनिया उप्पल के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम को तीन से पांच मई तक मीरा जाटव से जुड़े प्रकरणों की जांच सौंपी है। तीन मई को दिल्ली से मोनिया उप्पल टीम के साथ गुरसहायगंज कोतवाली पहुंचेगी। जबकि इस मामले को लेकर मानवाधिकार के निर्देश पर कन्नौज पुलिस ने टीम के सहयोग के लिए छह उप निरीक्षकों के एक पैनल का भी गठन किया है।
शासन के निर्देश पर कई बार हुई मीरा जाटव कांड की जांच
कन्नौज। पुलिस अभिरक्षा में हुई मीरा जाटव की मौत से जुड़े बसपा नेता और पुलिस विभाग के अफसर व कर्मचारियों के नाम के चलते शासन स्तर तक यह प्रकरण चर्चित रहा। पुलिस के लिए वह एक शातिर अपराधी थी तो, वहीं स्थानीय लोगों के लिए वह बेगुनाह थी। मीरा की मौत की जांच शासन के निर्देश पर तत्कालीन कानपुर के पूर्वी एसपी और रसूलाबाद के सीओ समेत अमृतपुर के सीओ को इसकी जांच सौंपी गई थी। इसके अलावा उसकी मौत की जांच कन्नौज के सदर एसडीएम समेत सदर सीओ को भी सौंपी गई थी।