कन्नौज। पकड़ी गई चंदन की लकड़ी पुलिस के लिए गले की फांस बन गई है। चंदन लकड़ी की तस्दीक कराने के लिए पुलिस को सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) या फिर राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) को सैंपल देकर जांच करानी होगी। इसके लिए दोनों संस्थानों ने पुलिस से शुल्क मांगा है। शुल्क जमा करने के बाद ही दोनों संस्थान किस पेड़-पौधे की लकड़ी है। इसकी पुष्टि कर जांच रिपोर्ट पुलिस को देंगे। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस कार्रवाई तय कर सकेगी।
शहर के मोहल्ला ताजपुर नौकास्त में 11 दिसंबर को दबिश देकर पुलिस ने करीब 25 क्विंटल लकड़ी बरामद की थी। वन विभाग और पुलिस टीम ने इस लकड़ी को चंदन की लकड़ी होने का दावा कर मकान मालिक अरशद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पकड़ी गई लकड़ी चंदन पेड़ की है या फिर किसी अन्य की पेड़ की है। इसकी तस्दीक और जांच रिपोर्ट के लिए अब पुलिस ने सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) और राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान लखनऊ (एनबीआरआई) से संपर्क किया। दोनों संस्थानों ने जांच कर लकड़ी किस पेड़ की है इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए सरकारी शुल्क भुगतान की पुलिस से मांग की है। पुलिस के लिए इन दोनों संस्थानों में से एक की रिपोर्ट सबसे अहम है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे कार्रवाई कर सकेगी।
तो फिर तेल निकाल कर होगी तस्दीक
एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि चंदन की लकड़ी की जांच के लिए विवेचक या फिर कोतवाली प्रभारी को उनके संस्थान के नाम पर पत्र जारी करना होगा। बरामद लकड़ी से तेल निकाला जाएगा। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसका शुल्क भी उन्हें देना होगा। जबकि एनबीआरआई बगैर तेल निकाले ही लकड़ी की पुष्टि करने में सक्षम है। पर, शुल्क वहां भी देना पड़ता है।