कन्नौज। आठ साल पूर्व छात्र का अपहरण कर हत्या के मामले में कोर्ट ने तीन दोषी दोस्तों को उम्रकैद सुनाई है। बीमारी से ग्रस्त एक अभियुक्त अस्पताल में भर्ती है। इसलिए अभी उसे कोर्ट ने सजा नहीं सुनाई है। वारदात में शामिल एक किशोर के मामले की सुनवाई किशोर न्यायालय कर रहा है।
उमर्दा ब्लॉक के दिसरापुर निवासी सर्वेश यादव गंगपुर कटरी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। उनकी पत्नी सुमन यादव दिसरापुर की प्रधान रह चुकी हैं। बेटे प्रशांत यादव और ऋषि यादव उर्फ आशू की बेहतर पढ़ाई के लिए तिर्वा-कन्नौज रोड में धीरा ताल के सामने मकान में लगे थे। छोटा बेटा ऋषि यादव हाईस्कूल में पढ़ता था। 25 नवंबर 2014 को 14 वर्षीय सहपाठी साजिश के तहत स्कूल जाने के लिए ऋषि को बुला ले गया था। इसके बाद सहपाठी ने अपराधी किस्म के दोस्त सलेमपुर तारा बांगर निवासी मोहित दुबे, संजय चौहान, सिपाही ठाकुर निवासी विजय यादव और मूल रूप से औरैया निवासी और उस समय चौहट्टा मोहल्ले में रह रहे अंकित के साथ मिलकर ऋषि का अपहरण कर लिया था। इन लोगों ने कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर ऋषि को बेहोश कर चौहट्टा मोहल्ला में अंकित के घर पर बंधक बना लिया था। इसके बाद सर्वेश यादव को फोन कर 12 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस ने ऋषि के जान-पहचान वाले दोस्तों की तलाश में दबिश शुरू कर दी थी। पकड़े जाने के डर से अपहरणकर्ताओं ने ऋषि का गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद घर के पीछे रस्सी से हाथ-पैर बंधे ऋषि के शव को फेंककर भाग गए।
बीती सात जुलाई को विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक-दो शिवकुमार तिवारी ने चार लोगों को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुुधवार को न्यायाधीश ने मोहित दुबे, अंकित पांडेय और विजय यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। दोषी करार दिया गया संजय चौहान बीमार है और कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती है। उसकी सजा पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। ऋषि के सहपाठी किशोर की सुनवाई किशोर न्यायालय करेगा। शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार ने बताया कि अभियुक्त अपराधी किस्म के थे। नशे की लत के साथ महंगे शौक पूरा करने के लिए अपहरण कर फिरौती मांगी थी। पकड़े जाने के डर से छात्र की हत्या कर दी थी।
20 मिनट पहले पहुंचती पुलिस तो बच जाती जान
छात्र के अपहरण की सूचना मिलते ही तत्कालीन कोतवाली प्रभारी भुल्लन यादव ने सबसे पहले अपह्त के सहपाठी पर शक जताते हुए उसके घर पर दबिश दी थी। परिजनों ने बताया कि वह सुबह से घर नहीं आया। इससे सर्विलांस टीम ने जब सहपाठी का नंबर ट्रेस किया तो चौहट्टा मोहल्ले में लोकेशन मिली। इसके बाद फिरौती मांगने के लिए किए गए फोन की भी लोकेशन चौहट्टा मोहल्ले में मिली। छानबीन में सामने आया कि अंकित मूलरूप से औरैया जनपद के कंचौसी का रहने वाला है। उसके पिता ने अंकित की पढ़ाने के लिए मकान खरीदा है। घर में सिर्फ अंकित रहता है। छात्र को बंधक बनाने के कई तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने रात करीब 10 बजे दबिश दी। इस दौरान अपहरणकर्ताओं ने ऋषि की हत्या कर शव फेंक दिया। पुलिस की जीप पहुंचते ही अभियुक्त छत से कूदकर भाग निकले थे।