जिले में एक ओर तो पुलिस को हाइटेक करने के लिए निरंतर नई-नई सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर मूलभूत जरूरतों पर नहीं ध्यान दिया जा रहा है। तरह-तरह की रुकावटें पुलिस के रास्ते में दीवार बनी खड़ी हैं। बानगी के तौर पर जीपीएस सिस्टम इस समय धड़ाम है। नेट की कनेक्टविटी गड़बड़ा जाने से पुलिस के वाहनों की लोकेेेेशन नहीं मिल पा रही है।
जनपद में जीपीएस सिस्टम के जरिए वाहनों की लोकेशन जांचने की व्यवस्था करीब एक महीने पहले शुरू की गई थी। इसके तहत करीब तीन दर्जन वाहनों को जोड़ा गया। सूचना मिलने पर उक्त वाहनों को घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। यही नहीं अत्याधुनिक कंट्रोल रूम में बैठे पुलिस के अधिकारी हर मिनट वाहन निकलने की जानकारी स्क्रीन पर देखते रहते हैं। आए दिन सर्वर डाउन होने के कारण यह व्यवस्था कारगर नहीं हो पा रही है।
तकनीकी खराबी के चक्कर में अक्सर कुछ वाहनों की लोकेशन पड़ोसी जनपद हरदोई में दिखाई पड़ने लगती है। जीपीएस सिस्टम बीएसएनल से जुड़ा है, जिसकी नेटवर्किंग संतोषजनक न होने के कारण पुलिस महकमा परेशान है। जरूरत के वक्त जब पुलिस के वाहन की लोकेशन पता करने की कोशिश की जाती है तो घंटो माथापच्ची के बावजूद नतीजा सिफर रहता है। तब फोन के लिए संबंधित वाहन वाहन चलाने वाले पुलिस कर्मी से संपर्क साधा जाता है। इस मैनुअल व्यवस्था में विलंब होता है।
अभी अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। नेटवर्किंग की समस्या को दुरुस्त करने का काम लखनऊ हेडआफिस से किया जा रहा है। जल्द ही इस व्यवस्था की खामी को दूर करा दिया जाएगा। इसके बाद सभी वाहनों की लोकेशन चंद सेकेंडों में स्कीन पर आ जाएगी।
कलानिधि नैथानी, एसपी कन्नौज।
आरआई ने लिखा था विभाग को पत्र
पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक ने बीते दिनों दूरसंचार विभाग को पत्र लिखा था। इसमें जीपीएस सिस्टम के बेहतर काम करने में बाधक बनी नेटवर्किंग समस्या का जिक्र किया गया था। उन्होंने कनेक्टविटी की खामियों को तत्काल दूर कराने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद स्थिति जस की तस है। अभी तक दूरसंचार विभाग बेहतर सेवाएं देने में नाकाम है। इसका खामियाजा अत्याधुनिक कंट्रोल रूम को भुगतना पड़ रहा है।
फालतू फोन वालों से पुलिस परेशान
पुलिस के कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर आए दिन बेवजह छोटे-छोटे बच्चों या अन्य शरारती तत्वों के फोन आने से पुलिस परेशान है। इसको पुलिस अधीक्षक ने गंभीरता से लिया है। अब यदि किसी शरारती तत्व या बच्चों ने बेवजह फोन किया तो संबंधित के वारिस या अराजकतत्व के खिलाफ सख्ती से निपटेगी। वारिस को कड़ी चेतावनी दी जाएगी, जबकि अराजकतत्वों के खिलाफ सीधे मुकदमा लिखकर कार्रवाई की जाएगी।