कन्नौज। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राघवेंद्र राव ने कहा है कि मोटे अनाज का उत्पादन कम पानी में होता है। गर्मी में भी इसकी पैदावार की जा सकती है। उर्वरक व बिना दवा के कम दिनों में फसलें होती हैं। वह मंगलवार को शहर के पर्यटक आवास गृह में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि तिर्वा के किसान बाजार में 15 फरवरी से तीन दिवसीय अन्न महोत्सव शुरू हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले ही दिन वह किसानों को कार्यक्रम में मोटे अनाज की फसलों के बारे में जानकारी देंगे। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि काफी पहले मोटे अनाज का उत्पादन होता था पर अब कम है। राष्ट्रीय बीज निगम के पूर्व निदेशक एसपी सिंह ने बाजरा, रागी, पर्ल मिलेट, माल मिलेट, स्माल मिलेट, कुटकी मिलेट, प्रोसो मिलेट, फिंगर के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया कि अगर जमीन अच्छी नहीं है व फसल के लिए पानी कम मिलता है, तो भी मोटा अनाज की फसल की जा सकती है। पूर्व निदेशक ने कहा कि गेहूं को लोग अधिक पसंद कर रहे हैं, इस वजह से मोटा अनाज किसान कम पैदा करते हैं।
-
सिमइयां, पास्ता व खीर भी बनाई जा सकती
पूर्व निदेशक ने बताया कि मोटे अनाज से सिमइयां, पास्ता, खीर व बर्फी आदि भी बनाई जा सकती है। बिस्किट समेत कई तरह के खाद्य पदार्थ बनते हैं। मोटे अनाज से बने पदार्थों से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि गेहूं के सापेक्ष इसका उत्पादन कम होता है। वर्तमान में लोग केमिकल लगाकर खाद्य सामग्री अधिक दिनों तक सुरक्षित रखते हैं, जिसके सेवन से शरीर को काफी हानि पहुंचती है।
-
गोष्ठी में शामिल होंगे प्रतिदिन 1500 किसान
पूर्व उप कृषि निदेशक जीसी कटियार ने बताया कि किसान बाजार में तीन दिनों तक अन्न महोत्सव में कानपुर मंडल स्तर के कन्नौज के अलावा कानपुर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, इटावा व औरैया जिलों के किसान शामिल होंगे। इसके अलावा हरदोई से भी किसान आएंगे। पूर्व उप कृषि निदेशक ने बताया कि हर रोज 1500 अलग-अलग किसान इसमें आएंगे। किसान समझदार होने के साथ ही खेती में नया करने वाले होंगे।