मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के तहत आर्थिक सहायता के लिए किए गए 70 आवेदन जिलाधिकारी ने तहसीलदार को वापस कर दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आवेदनों में लोगों ने इस्टीमेट नहीं लगाया था और कई आवेदन जांच के दौरान उपयुक्त नहीं पाए गए।
पिछली सपा सरकार में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के तहत हर माह सैकड़ों आवेदन तहसील में आते थे। इनकी जब जांच की जाती थी तो अधिकांश आवेदन फर्जी होते थे। सरकार बदलते ही अधिकारियों ने भी अपना रवैया बदल लिया है। जांच में इस्टीमेट न मिलने और गंभीर बीमारी न होने पर जिलाधिकारी जगदीश ने 70 आवेदन तहसीलदार को वापस कर दिए हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि आवेदन मिलते ही पहले मामले की बारीकी से जांच करें। इसके बाद उसे जिले पर भेजें।
एसडीएम उदयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के तहत उन लोगों को आर्थिक सहायता दी जा रही है जो बेहद गरीब हैं और उनके परिवार का कोई सदस्य असाध्य बीमारी से पीड़ित है। इलाज का खर्चा न वहन कर पाने के कारण शासन की ओर से यह व्यवस्था की गई थी। कई लोग इस कोष का अनुचित लाभ उठाना चाहते हैं। इस पर जांच के बाद गलत आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है।