काली नदी के इंदुयागंज घाट पर बना पुल चालू न होने से मंगलवार को दर्जनभर छात्र मौत के मुंह जाते-जाते बच गए। संयोग से खेतों में काम कर रहे लोगों की निगाह पड़ी बच्चों से भरी डगमगाती नाव पर पड़ी और वे दौड़ पड़े। नाव पलटते ही ग्रामीण नदी में उतरे और डूबते बच्चों को बचा लिए। इसके बाद ग्रामीणों ने पुल चालू करने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया।
काली नदी के इंदुइयागंज घाट पर पुल की नींव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी। यह पुल करीब 5 करोड़ 16 लाख 42 हजार रुपये की लागत से बनकर तैयार है। पुल के दोनों तरफ आवागमन के लिए रोड बनाने को 92 लाख 25 हजार रुपये का बजट भी स्वीकृत हुआ है। नदी के दूसरे छोर के किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो वे खेत से सड़क निकालने का विरोध कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सड़क नहीं बनी और लोग पुल के बजाय नाव से ही नदी पार करते हैं।
मंगलवार सुबह टिलियाभूड़ के तमाम बच्चे नाव से इंदुइयागंज जा रहे थे। दर्जनभर से ज्यादा बच्चों के साथ ही कुछ बड़े लोग भी नाव पर सवार हो गए। नदी के बीच में पहुंचते ही नाव डूबने लगी। इससे चीख पुकार मच गई। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग दौड़ पड़े। किसी तरह सभी बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने पुल चालू कराने और मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस संबंध में एडीएम का कहना है कि मुआवजा देने के लिए शासन से अतिरिक्त बजट मांगा गया है। बजट मिलते ही मुआवजा देकर सड़क का निर्माण कार्य कराया जाएगा।