रोडवेज बस स्टॉप पर बस में बैठते यात्री।
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कन्नौज। छिबरामऊ के घिलोई में हुए बस हादसे के बाद अवैध तरीके से सवारियां ढो रहीं टूरिस्ट बसों पर लगाम लगने से रोडवेज का मुनाफा बढ़ गया है। हादसे के बाद यानी 11 से 16 जनवरी के बीच छह दिनों में 1.76 लाख रुपये का रोडवेज को मुनाफा हुआ है। इस मुनाफे को अगर महीने के हिसाब से देखा जाए तो यह 52 लाख से ज्यादा पहुंचता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि किस तरह अफसरों के रहमोकरम पर चल रहीं टूरिस्ट बसें राजस्व को चूना लगा रही थीं।
कन्नौज डिपो से जयपुर के लिए एक व दिल्ली के लिए आठ बसें प्रतिदिन संचालित हो रही हैं। सवारी न मिलने से बसें तकरीबन खाली जा रही थीं। ऐसा इसलिए था कि टूरिस्ट बसें कम किराये पर ज्यादा सुविधाएं दे रही थीं। टूरिस्ट बसों के अवैध संचालन से रोडवेज की बसों को सवारियां नहीं मिल रही थीं। इससे आमदनी कम हो रही थी। कन्नौज डिपो से संचालित बसों से होने वाली आय के आंकड़े बताते हैं कि हादसे से छह दिन पहले और बाद में काफी अंतर आया है।
जयपुर के लिए प्रतिदिन चलने वाली एक बस से पांच से 10 जनवरी (हादसा भी 10 जनवरी की रात हुआ था) के बीच यानी छह दिनों में एक लाख 86 हजार 503 रुपये की आमदनी हुई थी। यानी प्रतिदिन इस बस से करीब 31 हजार रुपये की आय हो रही थी। इस हिसाब से एक माह में यह रकम नौ लाख 32 हजार 515 रुपये होती है। हादसे के बाद अगले ही दिन यानी 11 जनवरी को रोडवेज की जयपुर जाने वाली बस की आमदनी बढ़ गई। 11 से 16 जनवरी के मध्य यानी इन छह दिनों में इस बस से 45 हजार 767 रुपये की आमदनी हुई। यानी रोजाना 14683 रुपये की आमदनी बढ़ गई। बसों का संचालन अगर ऐसे ही हुआ तो एक माह में रोडवेज को अब चार लाख 40 हजार 485 रुपये मिलने की उम्मीद है। यानी हर माह रोडवेज को अकेले जयपुर रूट पर 440485 रुपये की आमदनी होगी।
इसी तरह दिल्ली के लिए कन्नौज डिपो से आठ बसों का संचालन नियमित किया जा रहा था। इन बसों ने पांच से 10 जनवरी के मध्य छह दिनों में 11 लाख 50 हजार 68 रुपये की आय की थी। टूरिस्ट बसों के बंद होने के बाद 11 से 16 जनवरी के मध्य इन बसों की आय बढ़कर 12 लाख 38 हजार 274 रुपये हो गई। यानी एक दिन में डिपो की बसों को 14 हजार 701 रुपये का फायदा हुआ। जयपुर और दिल्ली रूट से ही कन्नौज डिपो की बसों ने छह दिनों में एक लाख 76 हजार 304 रुपये की ज्यादा आमदनी कर ली है।
छह दिनों में दिखने लगी बसों की आमदनी
एआरएम राजेश कुमार का कहना है कि अवैध तरीके से हो रहे टूरिस्ट बसों के संचालन से परिवहन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा था। इन बसों के बंद होने से परिवहन विभाग की आमदनी छह दिनों में ही दिखने लगी है। औसत देखा जाए तो कन्नौज डिपो की बसों को ही नौ लाख रुपये का नुकसान इन अवैध बसों के कारण अकेले जयपुर और दिल्ली रूट पर हर माह हो रहा था।