ईमानदारी आज भी जिंदा है, जिसकी मिशाल दी एक छात्र
ने। सड़क पर रुपयों से भरा थैला पड़ा मिलने पर छात्र की नीयत नहीं डोली।
उसने वह थैला पड़ोसी दुकानदार को सौंप दिया। बाद में पहुंचे व्यापारी को वह
थैला सौंप दिया गया।
नगर के एक प्रमुख व्यवसायी बाइक से बैंक में रुपये
जमा करने जा रहा थे। थैले में तीन लाख 22 हजार रुपये की नगदी थी। उनका
थैला नगरपालिका रोड पर मालीवाली गली चौराहा पर किसी तरह गिर गया। उसी दौरान
स्कूल जा रहे मोहल्ला त्रिपाठीनगर निवासी गुड्डू चौहान के पुत्र हर्षित
सिंह चौहान की नजर सड़क पर पड़े उस थैले पर पड़ी, उसने वह थैला उठा लिया।
जब उसने उसे खोलकर देखा तो वह दंग रह गया। थैले में नोटों की गड्डियां देख
उसने अपनी मां को जानकारी दी। इसके बाद उस थैले को पड़ोस में रह रहे डॉ.
रवी त्रिपाठी को सौंप दिया। उधर, बैंक पहुंचने पर व्यापारी को जब बाइक में
थैला नहीं मिला तो उसके होश उड़ गए।
वह अपने साथी समेत थैले की तलाश
में पैदल ही निकल पड़े। सभी दुकानदारों से पूछते हुए जब वह माली वाली गली
चौराहे पर पहुंचे और थैले के संबंध में पूछताछ की। तो वहां मौजूद डॉ. रवी
त्रिपाठी ने पहले तो थैले और उसमें रखे सामान की बारे में पूछा।
जब
व्यापारी ने पूरी बात सही बता दी तब उन्होंने नगर के सरस्वती विद्या मंदिर
में कक्षा आठ के छात्र हर्षित सिंह चौहान को बुलाया और उसके द्वारा
व्यापारी को थैला सौंप दिया। छात्र के द्वारा दिखाई गई इस ईमानदारी की घटना
नगर में चर्चा का विषय बनी रही।