जनवरी माह के दूसरे सप्ताह से मौसम में अचानक आए
बदलाव का सीधा असर आलू की फसल पर पड़ रहा है। रात्रि के समय पाला एवं कोहरा
के जोर पकड़ने से आलू की बेल पर असर पड़ रहा है, जिससे आलू का उत्पादन
घटने की संभावनाएं हैं।
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इस मौसम से फसल
को बचाने का कोई विशेष इलाज भी नहीं है। ज्ञात हो कि नवंबर और दिसंबर माह
में मौसम काफी गरम रहा है। मौसम के गरम रहने से आलू की फसल पर कोई विशेष
प्रतिकूल असर नहीं रहा। हालांकि, गेहूं की फसल जरूर प्रभावित रही है।
जनवरी
के दूसरे सप्ताह से शुरू हुई हाड़कंपाऊ ठंड ने आलू की फसल पर सीधा प्रभाव
डाला है। पिछले एक सप्ताह से कोहरा व पाला पड़ रहा है। शनिवार को धूप थोड़ी
चटक निकली है। इसके पहले के दिनों में धूप नहीं निकली। हालांकि, इस मौसम
का गेहूं की फसल पर अच्छा प्रभाव पड़ा है। सर्दी शुरू होने के बाद से गेहूं
की फसल काफी बेहतर हुई है।
जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव का कहना है
कि जिले में 48 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुआई हुई थी।
पिछले वर्ष से करीब एक हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यदि
मौसम ऐसे ही रहा तो आलू की फसल में दस से पंद्रह फीसदी तक नुकसान पहुंचने
की संभावना है।
कहा कि आलू का साइज घटने की संभावनाएं भी प्रबल हैं। आलू का
साइज घटने पर उत्पादन कम होगा। हालांकि, उत्पादन में कोई विशेष गिरावट
नहीं होगी। पिछले वर्ष जो उत्पादन निकला था, उसी के आसपास रहेगा, क्योंकि
एक हजार हेक्टेयर का रकबा उस कमी को पूरा कर लेगा।