कन्नौज। शीतगृह स्वामियों के साथ कलेक्ट्रेट के गांधी सभागार में जिलाधिकारी शुभ्रांत शुक्ल ने बैठक करते हुए कहा कि खराब आलू का निस्तारण वैज्ञानिक ढंग से किया जाए।
खराब आलू इधर-उधर खुले में न डाला जाए। खुले में खराब आलू के निस्तारण से पर्यावरण दूषित होता हैं। इसलिए निस्तारण सुरक्षित स्थान पर और सुरक्षित ढंग से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शीतगृह से आलू निकासी 80 फीसदी हो गई है। नवंबर के अंतिम सप्ताह तक आलू की निकासी शतप्रतिशत हो जानी चाहिए। शीतगृह स्वामी किसान भाइयों को प्रेरित भी करें। शीतगृह में सारे अग्निशमन उपकरण क्रियाशील रखें जाए। साथ ही तीन माह के अंतराल में फायर ऑडिट होना चाहिए।
आगजनी की घटना से बचने के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी कराई जाए, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। अभी हाल ही में आशा शीतगृह, छिबरामऊ में आगजनी की घटना हुई थी। इसलिए शीतगृह में सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
लघु सिंचाई विभाग की बैठक में डीएम ने कहा कि सभी शासकीय और अर्द्धशासकीय भवनों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग लगा होना चाहिए। पहले उस क्षेत्र में फोकस किया जाए, जहां पानी का लेवल बहुत ही डाउन है।
उन्हें बताया गया कि 39 पंचायत भवनों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया गया है। इसी प्रकार 37 विद्यालयों का सर्वे भी कर लिया गया है। कहा कि जिन पंचायत भवनों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य नहीं हुआ है, वहां पर जल्द कार्य पूर्ण कर लिया जाए। प्राथमिक विद्यालयों में भी वाटर हार्वेस्टिंग का होना आवश्यक है।
जलालाबाद तालग्राम क्षेत्र में पानी का स्टेटस बहुत ही कम है इसलिए वहां पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अर्द्धसरकारी भवनों में भी वाटर हार्वेस्टिंग लगाए जाने के लिए प्रेरित किया जाए।
मनरेगा कन्वर्जन से भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कार्य करने के लिए कहा। बैठक में सीडीओ आरएन सिंह, डीएफओ राकेश सिंह, डीआईओएस, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी आदि मौजूद रहे।