कन्नौज। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के दौरान बच्चे की मौत के मामले में मीडिया की खबरों को संज्ञान में लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जवाब तलब किया है। प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर एक महीने में जवाब मांगा है। जिलाधिकारी की दो समिति डॉक्टर और स्टाफ को क्लीन चिट दे चुकी है।
सदर कोतवाली के गांव मिश्रीपुर निवासी प्रेमचंद्र के बेटे अनुज (04) को बुखार और गर्दन में सूजन की शिकायत थी। 28 जून को शाम करीब चार बजे वह अनुज को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड पहुंचा। प्रेमचंद्र का आरोप था कि डॉक्टरों ने पहले इलाज करने से इनकार कर दिया था। इससे बच्चे की हालत बिगड़ी। देरी से इलाज शुरू होने के कारण बच्चे की मौत हो गई। इलाज में लापरवाही का वीडियो वायरल होने पर जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने जांच के लिए एसडीएम सदर शैलेष कुमार और एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र आर्या की दो सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति ने अस्पताल में डॉक्टरों, स्टाफ और प्रेमचंद्र के घर जाकर उसके बयान लिए।
जिलाधिकारी को सौंपी रिपोर्ट में समिति ने डॉक्टरों व स्टाफ को निर्दोष पाया बताया था। मीडिया की खबरों को संज्ञान में लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस कर संपूर्ण विवरण के साथ चार सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। आयोग ने पूछा है कि लापरवाही करने वाले डॉक्टरों, संबंधित अस्पताल के अधिकारियों पर क्या कार्रवाई और मृतक के परिवार क्या राहत दी गई है। सीएमओ डा. कृष्ण स्वरूप का कहना है कि मानवाधिकार आयोग से मुख्य सचिव को नोटिस मिलने की मौखिक जानकारी मिली है। मामले की पहले ही जांच हो चुकी है, बच्चे के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। शासन से पत्र मिलने पर जवाब भेजा जाएगा।