कुतबुल आक्ताब ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह के उर्स में जायरीनों की भीड़ उमड़ी। पूरी रात लोगों ने जवाबी कव्वाली का लुत्फ उठाया। शुक्रवार की सुबह दूसरे कुल शरीफ के बाद कार्यक्रम का समापन हो गया। हजरत ख्वाजा उस्मान हारूनी रह. अलैह के पीर व हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के दादा पीर हजरत हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह का सालाना उर्स धूमधाम से मनाया गया। उर्स के अंतिम दिन देररात महफिले शमां का प्रोग्राम हुआ।
इसमें मुंबई के सलीम जावेद और मुंबई की तनवीर कौसर के बीच कव्वाली का जवाबी मुकाबला हुआ। कव्वाल सलीम जावेद ने नात शरीफ मालिके कौशर, नबियों के सरदार, उनके वसीले से ही बनोगे जन्नत के हकदार, नबी से इश्क जरूरी है नबी से इश्क जरूरी है...को सुनकर लोग वाहवाही करने पर मजबूर हो गए। मेरा ख्वाजा महान जिनका राज हिन्दुस्तान को सुनकर अकीदतमंद झूम उठे। तनवीर कौसर नेेे-तूफान से कश्ती को वो पार लगाता है, हर डूबने वाले को अल्लाह बचाता है। मस्जिद की मीनारों से आती है सदा तेरी, इस दर से कभी कोई खाली नहीं जाता हैै।
इस हम्द को काफी पसंद किया गया। इसके अलावा नात शरीफ दाई हलीमा तेरी गोद में आया आमना का लाल, आए आए मोहम्मद...आए आए मोहम्मद सुनकर लोग वाहवाही करने लगे। रात 11.13 बजे पहला कुल शरीफ हुआ। इसमें अकीदतमंदों ने बड़ी तादात में दरगाह पहुंचकर नात शरीफ व मन्कबत पढ़ी। हजरत आफाक अहमद मुजद्दिदी नेे हजरत ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह की सीरत पर रोशनी डाली और उनके बताए रास्ते पर चलने की हिदायत दी।
इसके बाद गजलों का दौर शुरू हुआ। शुक्रवार की सुबह 4:13 बजे दूसरा कुल शरीफ हुआ। इसमें अकीदतमंदों ने दरगाह पहुंचकर फातिहा पढ़ी और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। इस मौके पर उर्स कमेटी के सदर हाजी शमसुल खान, नायब सदर नावेद खान, मेला प्रभारी उबैदुल हसन, अब्बुल हसन सिद्दीकी (मंगल), अफोजे भाई, लंगर प्रभारी हाजी मुदस्सिर हुसैन, लंगर इंचार्ज निसार खां, अफजाल खां, फिरोज खां (पारले), राशिद खां, छोटे कुरैशी, महबूब आलम सहित कई लोग मौजूद रहे।