तालग्राम। करवाचौथ और दिवाली के नजदीक आते ही क्षेत्र में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों के चाक की चाल तेज हो गई है। कारीगरों ने अभी से दीपक, करवा, गुल्लक आदि बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। करवाचौथ पर करवा व दिवाली पर दीपक का विशेष महत्व है।
ग्राम सलेमपुर निवासी रामप्रकाश प्रजापति ने बताया कि इस बार बाजार में छोटे-बड़े कई तरह के आकर्षक दीपक देखने को मिलेंगे। रंग-बिरंगे दिए के साथ गुल्लक और करवा भी तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए गांव के तालाब से चिकनी मिट्टी लाकर स्टॉक किया जा रहा है। पहले मिट्टी को गूंथकर चाक पर दीपक और बर्तन को आकार दिया जाता है। फिर धूप में सूखाकर भट्ठी (अवा) में पकाया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछली दिवाली 20 हजार दीपक और एक हजार करवा की बिक्री हुई थी। इस बार महंगाई होने पर भी अधिक बिक्री होने की उम्मीद है। एक दिन में 40 करवा और तीन से चार सौ दीपक बनकर तैयार हो रहे हैं। सीतापुरवा के जगदीश प्रजापति ने बताया कि 29 अक्तूबर को करवाचौथ है। ऐसे में मिट्टी के करने की विशेष मांग रहती है। मिट्टी के करवा तैयार करने उन्हें सुखाने और फिर रंगाई में काफी मेहनत करनी पड़ती है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं। सुंदर करवा 25 से 30 रुपये में बिक जाता है।