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जयचंद के किले की खुदाई की एएसआई से होगी अपील

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मैनफ्रेड एजे इडर से बातचीत करते सांसद सुब्रत पाठक। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। विश्वभर में खेले जाने वाली शतरंज के कन्नौज में ईजाद को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुक्रवार को समापन हुआ। सांसद सुब्रत पाठक, इतिहासकारों और समाजसेवियों ने इसमें भाग लिया। इसके बाद विदेशी मेहमान नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। जाने से पहले जर्मनी की संस्था चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्टोरिक रिसर्च के संस्थापक ने शहर के प्राचीन किले और बालापीर का भ्रमण किया। टीम के साथ किले का भ्रमण करने के बाद उन्होंने कहा कि अगर कन्नौज के राजा जयचंद के किले की खुदाई होती है तो बहुत सारे पुरावशेष, मृण मूर्तियां, धातु मिल सकती है। वह महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली से मुलाकात कर किले की खुदाई की अपील करेंगे। सांसद सुब्रत पाठक ने संसद में प्राचीन किले की खुदाई का मुद्दा उठाने की बात कही है।
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शतरंज के ईजाद को लेकर चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्टोरिक रिसर्च के संस्थापक मैनफ्रेड एजे इडर करीब 20 साल से 50 देशों में प्रतिनिधियों की मदद से शोध कर रहे थे। 2019 में कन्नौज के राजा हर्षवर्धन के इस खेल की शुरुआत करने के साक्ष्य सामने आए थे। इससे 27 और 28 फरवरी को शहर के भारतीय पुरातत्व के संग्रहालय में सेमिनार का आयोजन किया गया। डॉ. फ्रैंक सेवेकैंप (जर्मनी), डॉ. एल्के रोगर्स डाटर (स्वीडन) डॉ. रेनेट सैय्यद (जर्मनी) डॉ. लियंडर ए फेलर (जर्मनी), डॉ. पीटर उल्लरिच (कनाडा) और भारत केसी. पांडुरंगा भट्ट (फारमर कोआर्डिनेटर मैनेजमेंट सेंटर फार ह्यूमन, वैल्यूज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता) ने भाग लिया। सेमिनार में शतरंज के सातवीं सदी में कन्नौज के राजा हर्षवर्धन ने चतुरंगा के रूप में ईजाद करने पर मुहर लगी।
शुक्रवार को सेमिनार के समापन पर सांसद सुब्रत पाठक, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत, तिर्वा के देवेश्वर नारायण और उनकी पत्नी सुनीता सिंह, साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ला, एनसी टंडन ने भाग लिया। एजे इडर से कहा कि कन्नौज की गलियों और खेतों में मिले अश्वरोही, गजारोही, पैदल सिपाही और राजा की मूूर्तियों से शतरंज के कन्नौज में ईजाद की सच्चाई उजागर हुई है। सेमिनार के अंत में एजे इडर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि कन्नौज प्रतापी राजाओं की भूमि है। यहां के लोगों से उन्हें बेहद स्नेह मिला है। इस शहर से जाने का मन नहीं है। कन्नौज को विश्व में विख्यात करने के लिए उन्हें अभी बहुत कुछ करना है। इसे पूरा करना ही उनका मकसद है।
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25 साल पहले कराई गई थी किले की खुदाई
25 साल पहले उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल कन्हैया लाल मणिक लाल मुंशी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से राजा जयचंद के किले की खुदाई कराई थी। इस दौरान मूर्तियां और मिट्टी के बर्तन मिले थे। इसके बाद किले और उसके आसपास के इलाके को संरक्षित किया गया था। राजनीतिक दखल के चलते खुदाई बंद करा दी गई थी। सेमिनार में यह जानकारी साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ला ने विदेशी मेहमानों को दी।
2021 में म्यूनिख के बाद फिर कन्नौज में होगा सेमिनार
एजे इडर ने कहा कि वह 2021 में जर्मनी के अपने शहर म्यूनिख में शतरंज के ईजाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार करेंगे। इसके बाद 2022 में दिल्ली या कन्नौज में सेमिनार का आयोजन करेंगे। इसमें विश्व के 50 देशों से लोगों को बुलाया जाएगा। इस बार कुछ कमियों के चलते बड़े स्तर पर सेमिनार नहीं हो पाया है।
किशोर हुजैफा अमीन ने भेंट किया पहिया
सेमिनार में मैनफ्रेड एजे इडर को काजियाना में रहने वाले 16 वर्षीय मदरसा के छात्र हुजैफा अमीन ने खिलौने का पहिया भेंट किया। यह पहिया कुषाण काल के खिलौने का है। इसे एजे इडर ने संग्रहालय के अध्यक्ष दीपक कुमार को सौंप दिया। हुजैफा अमीन ने बताया कि अद्भुत आकृति वाला यह पहिया उसे मोहल्ले के टीले पर मिला था।
शुंग कालीन मूर्ति कला पुस्तक का विमोचन
तिर्वा में रहने वाले इतिहासकार डॉ. सुदीप कुमार की पुस्तक शुंग कालीन मूर्ति कला का विमोचन हुआ। एजे इडर ने प्रोफेसर अविनाश मिश्रा विभागाध्यक्ष प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग डीएवी कालेज के साथ विमोचन किया। पुस्तक में शुंग काल में मिट्टी के खिलौने, बर्तन बनाने के बारे में दर्शाया गया है। शुंग काल में सांचों से मिट्टी के खिलौने और बर्तन बनाने की शुरुआत की गई थी।
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